शुद्धसागर महाराज का जजावर में मंगल प्रवेश, संस्कारों का महत्व बताया
जजावर
सीसोला कस्बे में 14 जून से आयोजित होने वाले वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव की सभीतैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
वही आचार्य गुरुवर शुद्धसागर महाराज का मंगलवार सुबह जजावर में मंगल प्रवेश हुआ।जजावर जैन समाजबंधुओं ने महाराज की अगवानी की। जिस घर के सामने से मुनिश्री गुजरे, वहां समाजबंधुओं ने पाद प्रक्षालन किया। इस दौरान जयकारे भी गूंजते रहे। जजावर जैन समाज के अध्यक्ष प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि सुबह सात बजे महाराज ने दिगंबर जैन मंदिर में प्रवेश किया। उसके बाद जजावर जैन मंदिर में शांतिधारा हुई।महाराज श्री ने शांतिधारा के मंत्रों का उच्चारण किया।मंगलवार शाम महाराज श्री ने सीसोला में हो रहे वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए प्रस्थान किया।
इस अवसर पर उन्होंने जजावर में अपने प्रवचन में कहा कि कौन व्यक्ति किस प्रकार भाषा का प्रयोग करता है, व्यक्ति के मनोभाव क्या हैं, यह जानने का माध्यम भाषा ही बनती है। ऐसे में मनुष्य को अपनी भाषा पर कंट्रोल रखना चाहिए।
मनुष्य की पांच इंद्रियों में से रसना इंद्रिय बोलने और खाने का का काम करती हैं, दोनों पर नियंत्रण जरूरी है। यदि बोलने में चूक होती है तो विवाद पैदा होता है। और खाने में संयम व विवेक नहीं हो तो स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। मुनिश्री ने कहा कि अच्छी सोच, अच्छा चिंतन व अच्छे विचार वाला व्यक्ति स्वयं के साथ दूसरे का भीकल्याण कर सकता है। जहांअच्छी सोच व अच्छे विचार वाला व्यक्ति दूसरे का भी कल्याण करता है।
व्यक्ति में दूसरे को नीचे गिराने,ईष्र्या, द्वेष भावना की मनोवृति
होती है, वहां समाज भी विकासनहीं कर सकता। ऐसे मामले में
संबंधित व्यक्ति के साथ परिवार वसमाज का भी पतन होना निश्चित है ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
