आचार्य श्री के कर कमलों से नेमावर में दीक्षा होनी थी परंतु देर से पहुंची, पुण्य का योग्य था , दीक्षा हो गई समुन्नमति माताजी

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आचार्य श्री के कर कमलों से नेमावर में दीक्षा होनी थी परंतु देर से पहुंची, पुण्य का योग्य था , दीक्षा हो गई समुन्नमति माताजी
सागर
आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका 105 समुन्नमति माताजी का दीक्षा दिवस भाग्योदय तीर्थ सागर में मनाया गया।

 

इस अवसर पर माता जी ने अपने दीक्षा के समय का संस्मरण सुनाया जिसे सुन हर कोई भाव विहल था उन्होंने अपनी दीक्षा के विषय में कहा कि उनकी दीक्षा 6 जून 1997 को सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर में हुई थी। इस पर उन्होंने बताया कि उन्हें अपने आर्यिका दीक्षा होने की सूचना अशोकनगर पहुंची। यहां से निकलने पर नेमावर पहुंचते-पहुंचते दोपहर की 12:00 बज गए।

पूज्य आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल समर्पित किया लेकिन उन्होंने कहा कि अब तो दीक्षार्थियों की सूची बन गई है। लेकिन पुण्य का योग था और आचार्य श्री ने आशीर्वाद दे दिया।

 

 

 

उन्होंने कहा कि आज 27 वा दीक्षा दिवस है और दीक्षा लिए हुए 26 वर्ष हो चुके हैं। आर्यिका दृढ़मति माताजी ने गुरुदेव से कहा था कि यह बहन लंबे समय से साधना कर रही हैं। इनकी दीक्षा होनी ही चाहिए। तब आचार्य श्री ने अमित दीक्षा दी। आज हम साधना करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ रहे हैं।

आर्यिका 105 साधनामती माताजी, समितिमति माताजी भाग्योदय तीर्थ नहीं विराजमान है। इस पुनीत बेला बालिका मंडल द्वारा आचार्य श्री की पूजन नृत्य करते हुए, अष्ट द्रव्य समर्पित किए गए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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