वर्तमान में व्यक्ति का भाव की संस्कार अपेक्षा से नीचे की ओर जा रहा है। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज

धर्म

आध्यात्म • बच्चों को अच्छे संस्कार देने पर दिया जोर, आचार्य श्रीजी विद्यासागर महाराज ससंघ ने डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी में प्रवचन देते हुए कहा
शिक्षा पद्धति से बाहरी विकास हो रहा, संस्कार नहीं दिख रहा

वर्तमान में व्यक्ति का भाव की संस्कार अपेक्षा से नीचे की ओर जा रहा है। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज

डोंगरगढ़

विश्व वंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में सोमवार की बेला में प्रवचन में कहा कि आज  वर्तमान में व्यक्ति का भाव संस्कार की अपेक्षा से नीचे की ओर जा रहा है।

 

 

उन्होंने कहा ऊपर से उसे बहुत कुछ दिया तो जाता है जिसका असर ऊपर, ऊपर देखने को मिलता है। परन्तु अंदर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। भाव जो है वो अंदर का विषय है,जिस पर बाहर के निमित्त आदि का कोई असर नहीं पड़ता है।

 

 

आज की शिक्षा के बारे में उन्होंने कटाक्ष करते हुुए कहा की आज की जो शिक्षा पद्धति है वह केवल बाहरी विकास के लिए कार्य कर रही है। अंदर से संस्कार आदि देने का कार्य कहीं भी देखने को नहीं मिलता है

आचार्य श्री ने कहा कि कुछ लोग अपने बच्चो को लेकर आते हैं और कहते हैं महाराज बच्चे को आशीर्वाद दे दो ताकि उसका भविष्य उज्जवल हो सके।

उन्होंने कहा आप लोग 19वीं शताब्दी20वीं, 21वीं, 22वीं शताब्दी को पार कर चुके हैं और अब वह बालक तेईसवीं शताब्दी का यदि धर्म कर्म के लिए आ रहा है मतलब इसका  पुण्य है, तभी यहां तक आयाहै और यह शुभ चिन्ह भी है अंदरके भाव के लिए संस्कार देनाआवश्यक है। धर्म का अर्थ आस्था,श्रद्धा भक्ति है और कर्म का अर्थ इसी के अनुरूप आ आचरण करना है।आज की भाषा में इसी को धर्म कर्म बोलते हैं। कर्म के बिना कोई भीकार्य संभव नहीं है पर इसके लिए भी भाव लगाना आवश्यक होता है।बहुत तीव्र गति से काल चक्र घूमरहा है परंतु जैन धर्म के सिद्धांत अनुसार काल चक्र घूमता नहीं है जबकि मनुष्य का मस्तिष्क बहुततीव्र गति से घूम रहा है जिसकी वजह से यह घुमाव ज्यादा है। बच्चे इसे एक प्रतिशत भी नहीं मान रहे हैं। मैं मानता हूं इस उम्र में हमारी क्या दशा थी, आज बाहर तो बहुतबीपरिवर्तन हो रहा है परन्तु भीतर कुछ भी परिवर्तन नहीं हो रहा है। एकपुरानी कहावत है कि बाहर वाला पासा फेंके, ऊपर वाला पासा फेंके और नीचे चलते दांव, अर्थ कि दृष्टि से इसमें कुछ परिवर्तन आवश्यक है।

आचार्य ने बताया कि हमने उनसेकहा कि आप आज से रात्रि में चारों प्रकार के आहार का त्याग कर दो, सूर्यअस्त के बाद कुछ भी नहीं खाना है।यह राम बाण है, राम बाण समझते हैं।ना आप लोग जिसको कोई विफलनहीं कर सकता, जो अचूक होता है,
जिसको कोई हरा नहीं सकता वहअमोक होता है, यह औषध से भीबढ़कर औषध का कार्य करेगा। कोईकुछ भी कहे सुन लेना लेकिन रात्रि में नहीं खाना अब उसका एलोपैथी में इलाज संभव नहीं हुआ तो वहआयुर्वेदिक उपचार कि ओर जा रहाहै, इसमें भी आपको शाकाहारीऔषधि ही उपयोग में लेना है। चाहे कुछ भी हो जाए आपको चाहे दवाई भी रात्रि में खाने को बोले तो  नहींखाना, जो भी औषधि आदि आप लेंगेतो दिन में ही लेना है रात्रि में नहीं।आप यदि रामदेव बाबा से या किसी से भी आयुर्वेदिक उपचार करवाते हैंतो उन्हें भी कह देना कि ये बाबा नेरात्रि में कुछ भी लेने के लिए मनाकिया हैं। तो वह समझ जायेंगे कि इसबाबा ने उस बाबा के पास भेजा है।रात्रि में कुछ नहीं लेना भी औषध का काम करता है।

 

   पूज्य श्री ने कहा कल एक  लड़का आया वह युवाथा उसके दोनों पैर जाम हो गए थे उसको व्हील चेयर पर उसकेपरिजन लेकर आए थे। और कहा महाराजजी आशीर्वाद दे दो इसकी ऐसी स्थितिहो गई है, कोई बात नहीं आप बोल रहे हो यही पर्याप्त है। विश्व के सभी डॉक्टरों ने कह दिया कि इसकेलिए कोई इलाज नहीं है सभी ने हाथ उठा दिया है कि इसका इलाजवीसंभव नहीं है, आप ही कुछ कीजिए जिससे यह ठीक हो जाए। हमनेवीकहा जब सभी डॉक्टरों ने कह दियाहै तो हमें कैसे पूछ रहे हो तो उसनेकहा आप सब कुछ कर सकते हो।ऐसे संस्कार डाले हैं।

             संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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