बिना लक्ष्य के घूमकर समय बर्बाद न करें आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
| डोंगरगढ़
आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज ने चंद्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में बुधवार के मंगल प्रवचन मे कहा की प्रातः मंद-मंद
हवा चल रही थी और एक भवराउसी के बहाव में जा रहा था किकहीं उसको फूल मिल जाए तोउसकी खुराक पूरी हो जाए। वहबहुत दूर तक चला जाता है परंतु उसेकहीं भी फूल दिखाई नहीं देता वह सोचता है कि यहां से यदि मैं लौटता हूं तो मेरा यहां तक आना व्यर्थ हो जाएगा और यदि आगे जाना व्यर्थ हो जाएगा। उलझन मे फस गया कि आगे जाऊया लौट जाऊ।
पूज्य श्री ने कहा इसी प्रकार कुछ लोगबिना लक्ष्य के ही इधर-उधर घूम-घूमकर अपना समय बर्बाद कररहे हैं और जिंदगी भर इसी उलझनमें फंसे रहते हैं कि किस मार्ग परजाना है और किस मार्ग पर नहीं हमारे आचार्यों ने हम पर उपकारकरके शास्त्रों के माध्यम से बताया हैकि सदमार्ग पर चल कर हम अपनाउद्धार किस प्रकार से कर सकते हैं।माता-पिता अपने बच्चे कोपढ़ा-लिखाकर उसके गले में शादीकी माला बांध देते हैं और वह दोनों दंपती जीवन पर्यंत उसी में उलझेर हते हैं, चाहे कितनी भी प्रतिकुलता हो, कैसी भी विपत्ति आ जाए सब मिलकर सहन कर लेते है
श्रुत पंचमी पर्व बुधवार को धूमधाम से मनाया गया। सुबह भगवान काअभिषेक, शांति धारा, जिनवाणी एवं
आचार्य का पूजन करके मनाया गया।मंदिर परिसर में जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथोंकी विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई।
जिससे जैन धर्म की प्राचीनता औरउनके रचयता का भी उल्लेख किया गया है।
हम तो 40 वर्षों से झेल रहे हैं
कुछ लोगों के कहने में आता है किमहाराज हम तो 40 वर्षों से झेल रहे हैं,एक बार एक वृद्ध दंपती हमारे पास आए और कह रहे थे कि महाराजआपके आशीर्वाद से सब बढ़िया रहा है, बेटा-बेटी सब बढ़िया है, सबकुशल-मंगल है बस बहु हमारी नहींसुनती है। ऐसा बहुत से घरों में आजकल हो रहा है। ऐसा सुनने में आता है,यह आप लोगों को सोचना चाहिए किऐसा क्यों हो रहा है और इस उलझन सेकैसे निकला जा सकता है। कहां जानाहै, कहां जा रहे हो, बच्चे, नवजवान और वृद्ध सभी वर्ग का यही हाल है,किसी को पता ही नहीं कि सही मार्गक्या है। किस मार्ग पर चल कर जीवन सार्थक कर सकते है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगनममंडी
