जरूरत है अपने तीर्थों की सुरक्षा के लिए युवा पीढ़ी को जाग्रत होने की स्वाति जैन

धर्म

जरूरत है अपने तीर्थों की सुरक्षा के लिए युवा पीढ़ी को जाग्रत होने की स्वाति जैन
जुरहरा
जैन पत्रकार महासंघ की हैदराबाद प्रभारी श्री मति स्वाति जैन द्वारा जुरहरा में आयोजित नवीन वेदी शिलान्यास समारोह में नूतन के साथ पुरातन धरोहर की सुरक्षा व विकास पर ध्यान देने की बात को पुरजोर तरीके से उठाया गया।

 

 

 

इस पर विशेष रूप से इस पर बोलते हुए कहा की हर दिन, हर जगह नवीन जिनालय के निर्माण हो रहे हैं। जिनालय का निर्माण होना सौभाग्य की बात है लेकिन हमें नये जिनालयों के निर्माण के साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना है कि हमारे प्राचीन जिनालय ,अतिशय क्षेत्र और सिद्ध क्षेत्र भी सुरक्षित रहें।

 

आज सम्मेद शिखरजी, गिरनार जी, पालीताणा, ऋषभदेव जी हर जगह खतरे की तलवार लटकी हुई है और हाल ही में हुई इंदौर की गोम्मटगिरी की घटना ने तो सबको सकते में ला दिया है कि हम जैन लोग अपने गढ़ में ही अपने मंदिरों की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं।

 

 

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा की क्या कभी किसी ने सोचा है कि हमारे जिन मंदिर खतरे में क्यों हैं? क्योंकि हमारी जो युवा पीढ़ी है उसने मंदिर आना छोड़ दिया है और पूजा प्रक्षाल करना छोड़ दिया है।जब हम बड़े सिद्ध क्षेत्रों को नहीं बचा पाये जिनसे करोड़ों मुनि और तीर्थंकर मोक्ष गये हैं तो फिर हजारों दूसरे जिनालयों को हम लोग कैसे बचा पायेंगे।
जरूरत है अब अगर जैन समाज को अपनी जैन समृद्धि दिखानी है तो अपनी जैन संस्कृति को बचाने में दिखायें और अपनी जैन पहचान को बरकरार रखने में दिखायें ना कि किसी तरह का झूठा दिखावा करने में। अगर हम लोग शाहरुख की मूवी देखने जाते हैं , तो जैन धर्म की फिल्में देखने के लिये भी समय निकालें, अगर हम लोग होटल में खाना खाने जाते हैं तो मंदिर के दर्शन के लिए भी जायें, अगर हम लोग वाटर पार्क में नहाने के लिए जाते हैं तो आधा घंटा निकालकर भगवान के अभिषेक के लिए भी आयें।
आज हम जैन लोगों की पहचान उस बिन पैंदे के लोटे की हो गयी है जो भोग विलास में तो हजारों रुपए खर्च करता है लेकिन अपने गुरुओं की फिल्मों को फ्री में देखना चाहता है।
अब जरूरत है कि मुनि महाराज और साधू साध्वी नये जिनालयों के निर्माण के साथ ही बच्चों और युवाओं में धार्मिक संस्कारों के बीजारोपण के लिये कार्य करें। धार्मिक विद्यालय खोलें, जैन चिकित्सालयों और औषधालयों की शुरुआत करें। ताकि बच्चे शुरू से ही अपने श्रृमण धर्म को जान सकें , उसकी महत्ता और प्राचीनता को समझ सकें
और उन्हें वीक में बारी – बारी से कम से कम एक दिन प्रक्षाल लेने का नियम दिलवायें ताकि मंदिरों में रौनक रहे और मंदिर सुरक्षित रहें। तभी मंदिरों में रौनक भी रहेगी और मंदिर परिसर खाली नहीं रहेंगे।
ताकि कोई भी हमारी विरासत पर गलत नजर ना रख सके और तभी हम जैन धर्म की पताका फहरा सकेंगे।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *