रिद्धि मंत्र के प्रभाव से रूखा सूखा भोजन भी रस युक्त हो जाता है। आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
उदयपुर
वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी उदयपुर में विराजित होकर विभिन्न उप नगरों में धर्म प्रभावना कर रहे हैं ।सेक्टर 5 प्रभात नगर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुएआचार्य श्री ने बताया 64 ऋघि विधान में 24 तीर्थंकर, 1400 से अधिक गणघर स्वामी, मुनिराजो साधुओं की पूजन की जाती है ।
भगवान के दिव्य देशना को धारण करने की क्षमता गणधर स्वामी में होती है गणधर स्वामी के माध्यम से जिन की वाणी जिनागम प्राप्त हुई।जिन्हें आचार्य देव ने शास्त्रों में लिपिबद्ध किया ।इन ऋधियो के प्रभाव से सभी प्रकार के रोग शोक दुख दूर हो जाते हैं विघ्न बाधाएं दूर हो जाती है।
ब्रह्मचारी गजू भैय्या राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि आप 64 ऋघि विधान की पूजन कर रहे हैं भेद बताते हुए आचार्य श्री ने बताया कि बुद्धि 18, चारण 9 , बल 3 रस 6 विक्रिया 11 , तप 7, औषधि 8 अक्षीण के 2 इस प्रकार 64 ऋघि होती है।इनके अध्य आपने मंडल विधान पर अर्पित किए।

आचार्य श्री ने प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के अनेक गुणों का वर्णन किया। द्रोणागिरी के घटना बताइ, कि रात भर एक शेर आचार्य श्री के समक्ष बैठा रहा जब वह वनराज सुबह उठकर जंगल वापस गया जब आचार्य श्री पहाड़ से नीचे आए। तपस्या का बहुत महत्व है छोटे-छोटे नियम से आप जीवन को आगे बढ़ा सकते हैं। नियम जो भी ले दृढ़ता पूर्वक नियमों का पालन करे नियम तोड़ना भंग नहीं करना चाहिए ।आचार्य श्री ने मुनि बेला नियम का जिक्र कर बताया कि मुनि श्री के आहार चर्या के बाद ही भोजन करना मुनि बेला नियम कहलाता है। आचार्य श्री शांतिसागर ने व्रत परिसंखायन में अनेक विधियां ली थी आचार्य श्री ने बताया ऋघि के प्रभाव से सूखा भोजन भी रस युक्त हो जाता है।आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री चिन्मय सागर जी एवम् मुनि श्री चिंतन सागर जी के प्रवचन हुए मुनि चिन्मय सागर जी ने श्रावक बनकर रत्न त्रय देव शास्त्र एवम् गुरुओं पर सच्चे श्रद्धान का उपदेश दिया।युवा मुनि श्री चिंतन सागर जी ने प्रवचन में भगवान को 18 दोषों से रहित सर्वज्ञ हितोपदेशी बताया जो ज्ञानवान है।
मंगलाचरण श्रीमती प्रीति ज्योति जैन ने किया। पांच पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण एवम् दीप प्रवज्जलन अतिथियों ने किया।
2 दिवसीय विधान के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य सुरेश लुणादिया परिवार को प्राप्त हुआ।
विधान पूजन पूर्ण होने पर विश्व शांति हेतु हवन किया गया।
14 मई को सेक्टर 11 में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा हेतु प्रातः मंगल विहार होगा।
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सलय भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
