दान छपा कर नही छुपा कर देना चाहिए वही उत्तम पुण्य का कारक है* आर्यिका आनंदमती माताजी
कामा
अक्षय तृतीया अर्थात दान पर्व के अवसर पर विजयमती त्यागी आश्रम में आर्यिका आनंदमति माताजी ने जैन श्रावक श्राविकाओं से कहा कि आज का पर्व प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव द्वारा प्रतिपादित आहार दान प्रवर्तन दिवस के रूप में मनाया जाता है।इस दिवस से आहार दान देने की परंपरा प्रारंभ हुई और कहा गया है कि दान छुपा कर देना चाहिए छपा कर नहीं क्योंकि छुपा कर दिया गया दान ही उत्तम पुण्य का कारक होता है।
आर्यिका माताजी ने कहा कि स्व:और पर के कल्याण की भावना के साथ प्रफुल्लित मन से दान दिया जाना चाहिए। जिससे दान लेने वाला भी प्रफुल्लित हो और आपके लिए स्वत: आशीष मिले। उन्होंने कहा कि दान चार प्रकार समदत्ति ,पात्रदत्ति ,करुणादत्ति ,सकल दत्ति दान होता है जिसमे पात्र दत्ति में औषध,शास्त्र,अभय,आहार दान सुपात्र अर्थात सन्तो को देना चाहिए। इनमें प्रमुख आहार दान है जिसमे चारो दान समाहित होते हैं। इस अवसर पर संजय जैन बड़जात्या ने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने विश्व को असी,मसी,कृषि,शिल्प,विद्या और वाणिज्य की षट शिक्षाएं प्रदान कर जीवन जीने की कलाएं प्रतिपादित की।
इस अवसर पर धर्म जागृति संस्थान के अध्यक्ष संजय सर्राफ ने भी विचार प्रकट किए।
इस अवसर पर सभी उपस्थित श्रावक,श्राविकाओं और बच्चों को सुभाष चंद दीपक जैन बिजली वालों की तरफ इक्षुरस का वितरण भी किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
