अक्षय तृतीया – अक्षय पुण्य प्राप्ति दिवसप्रथम पारणा या आहार दान प्रारम्भ तिथि

धर्म

अक्षय तृतीया – अक्षय पुण्य प्राप्ति दिवसप्रथम पारणा या आहार दान प्रारम्भ तिथि
भगवान ऋषभदेव की आहारचर्या
आहारचर्या के लिए मुनि ऋषभदेव को गाँव-नगर भ्रमण करते हुए लोगों को शिक्षा देनी होती थी,और बदले में लोग उन्हें कुछ दिया करते थे। चूँकि भगवान ऋषभदेव ने मनुष्यों को कुछ समय पहले ही सब शिक्षा दी थी और खेती-भोजन के महत्व को समझाया था, इसलिए उन लोगों को आहारदान देने की बात का ज्ञान नही था।

 

 

ऋषभदेव जी जहाँ-जहाँ भी आहारचर्या के लिए जाते, लोग उन्हें अज्ञानतावश बहुमूल्य वस्तुएं, धन, आभूषण इत्यादि भेंट स्वरुप दे दिया करते थे। उन्हें कही से भी आहार प्राप्त नही हुआ। इसी प्रकार एक वर्ष से भी ज्यादा का समय बीत गया लेकिन ऋषभदेव जी ने अन्न-जल ग्रहण नही किया था।

राजा श्रेयांश को आया स्वप्न
राजा श्रेयांश भगवान ऋषभदेव के पोत्र (पोते) थे और हस्तिनापुर राज्य के राजा। एक दिन उन्हें रात में स्वप्न आया जिसके अंत में उन्हें आहार का दान देने की बात कहीं गयी। उस स्वप्न में उन्होंने देखा कि कुछ ही दिनों में भगवान ऋषभदेव उनके नगर में पहुंचेंगे और तब उन्हें उनका स्वागत करके भेंट स्वरुप कुछ आहार देना हैं। इसके बाद उन्होंने अपने मंत्रियों से इसकी चर्चा की और राज्य में भव्य तैयारियां कर दी गयी।

राजा श्रेयांश के द्वारा ऋषभदेव जी को इक्षुरस भेंट
जैन धर्म की मान्यता के अनुसार, भगवान ऋषभदेव जी को अन्न-जल का त्याग किये हुए 13 माह से ज्यादा का समय हो चुका था। इसमें छह माह उनके उपवास के थे तो 7 माह अन्न-जल की भेंट ना मिल पाने के कारण भूखे रहना पड़ा था।
एक दिन भगवान ऋषभदेव गाँव-नगर भ्रमण करते हुए अपने पोत्र के राज्य हस्तिनापुर पहुंचे। भगवान ऋषभदेव को अपने नगर में आते देख प्रजाजनों की भारी भीड़ उनके दर्शन करने उमड़ पड़ी। राजा श्रेयांश भी दौड़ते-दौड़ते अपने भवन से बाहर आये और भगवान ऋषभदेव जी का स्वागत किया।
राजा श्रेयांश ने ऋषभदेव जी को प्रणाम किया और उनके चरण धोये। स्वागत के बाद उन्होंने ऋषभदेव जी को पीने के लिए इक्षुरस/ शोरडी गन्ने का रस दिया। तब भगवान ऋषभदेव जी ने 13 मास बाद अपना उपवास तोड़कर गन्ने के रस को ग्रहण किया था। यह भगवान आदिनाथ का दीक्षा प्राप्त करने के बाद का प्रथम आहार था।
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राजा श्रेयांश के नगर में देवों की कृपा व पंचाष्चर्य
राजा श्रेयांश के द्वारा भगवान आदिनाथ को प्रथम आहार देने पर देवता अत्यधिक प्रसन्न हुए। इंद्र व अन्य सभी देवता उसी समय स्वर्ग से हस्तिनापुर पहुँच गए और राजा श्रेयांश की नगरी को पंचाष्चर्य प्रदान किये। इन पंचाष्चर्य में आते हैं

नगर पर रत्नों, आभूषणों की वर्षा
साथ ही पुष्प वर्षा होना
उद्घोष होना या तेज आवाज़ में बाजो का बजना
पूरे नगर में सुगन्धित वायु बहना
राजा की प्रशंसा में जय-जय/ अहोदानम-अहोदानम का जयकारा होना।

भगवान ऋषभदेव का राजा श्रेयांश को आशीर्वाद
आहार ग्रहण करने के पश्चात भगवान ऋषभदेव ने राजा श्रेयांश को अक्षीण भोजन/ अक्षय भोजन का आशीर्वाद दिया था। अक्षय का अर्थ होता है कभी ना समाप्त होने वाले। उसके बाद से राजा श्रेयांश के नगर में भोजन की कभी कमी नही रही और कोई भी भूखा नही रहा। भगवान ऋषभदेव को प्रथम आहार देने के कारण राजा श्रेयांश को अक्षय पुण्य भी प्राप्त हुआ था। आशीर्वाद देकर भगवान ऋषभदेव वहां से आगे तपस्या करने चले गए थे।

राजा श्रेयांश का सम्मान व दानप्रथा का शुरू होना
इस घटना की सूचना मिलते ही राजा भरत व अन्य राजा हस्तिनापुर पहुंच गए थे। भरत के द्वारा राजा श्रेयांश का सम्मान किया गया। इसी के साथ राजा भरत ने संपूर्ण भारत में भोजन के दान की शुरुआत की और राजा श्रेयांश को दानतीर्थ प्रवर्तक की संज्ञा दी गयी।

 

अक्षय तृतीया नाम का अर्थ
जिस दिन भगवान आदिनाथ ने राजा श्रेयांश के हाथों इक्षु रस को पिया था वह दिन वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया थी। इक्षु से अक्षय तथा वैसाख शुक्ल तृतीया से तृतीया को मिलाकर इस दिन को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाने लगा।

एक ओर मान्यता के अनुसार, वैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को राजा श्रेयांश को अक्षयभोजन व अक्षयपुण्य का फल प्राप्त हुआ था। इसलिए इसे अक्षय तृतीया नाम दिया गया।
जैन धर्म में अक्षय तृतीया का महत्व
भगवान ऋषभदेव के द्वारा प्रथम बार आहार ग्रहण करने के कारण, इस दिन का जैन धर्म में महत्व अत्यधिक बढ़ गया था। कुछ लोग इस दिन पारायण कर एक वर्ष का व्रत समाप्त करते है तो कुछ लोग इस दिन खुलकर दान करते हैं। जैन लोगों के द्वारा इस दिन जगह-जगह मुख्य रूप से गन्ने के रस का दान किया जाता हैं।

साथ ही इस दिन को सभी कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया हैं जैसे कि गृह प्रवेश, नयी चीज़ खरीदना, विवाह-लग्न करवाना, किसी काम की शुरुआत करना इत्यादि। कुल मिलाकर यह दिन जैन धर्म के साथ-साथ हिंदू धर्म के लोगों के लिए भी अत्यंत शुभ दिन माना गया है।
:- संजय जैन बड़जात्या कामां,राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री,जैन पत्रकार महासंघ से संकलित जानकारी के साथ
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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