आज देश में सुख, शांति के लिए अहिंसा धर्म की बहुत आवश्यकता है विसोम्य सागर

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आज देश में सुख, शांति के लिए अहिंसा धर्म की बहुत आवश्यकता है विसोम्य सागर

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शनिवार को गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर कटरा में चातुर्मास रत क्षुल्लक 105 श्री विसोम्य सागर महाराज ने धर्मसभा मे अहिंसा का महत्व बताया  उन्होने इस बात पर बल दिया की आज देश में सुख, शांति के लिए अहिंसा धर्म की बहुत आवश्यकता है अहिंसा धर्म का प्रचार-प्रसार बहुत  जरूरी  बताया । दुनिया में जितने प्रकार के व्यक्ति होते हैं, उतनी ही प्रकार की सोच होती है। यह भी कहा की  हमें दूसरों की सोच में कमी निकालने की जगह अपनी सोच में सकारात्मकता लाने की जरूरत है तभी हम अपना कल्याण कर सकते हैं।

उन्होने चांदी के वर्क का उदाहरण देते हुए बताया की चांदी की वर्क वाली मिठाई देखकर लोग आकर्षित हो जाते हैं। उसी तरह क्रीम पाउडर से लिपे हुए चेहरों को देखकर लोग आकर्षित होते हैं। पर इन चेहरों के पीछे का आत्मतत्त्व, स्वरूप सबका एक जैसा ही है। वही आत्मा दुनिया का एकमात्र सच है। संस्कारों का स्पष्टीकरण होना चाहिए।

हम इस जन्म को विषय भोगों में लगाकर जीवन की सार्थकता को स्वयं ही नष्ट कर देते हैं। विरंजन सागर

धर्म सभा मे बोलते हुए जनसंत विरंजन सागर महाराज ने कहा कि मिथ्या दर्शन, ज्ञान और चरित्र के कारण ही सांसारिक प्राणी संसार में भटक रहा है। आत्मा को मनुष्य जन्म बार-बार नहीं मिलता। हम इस जन्म को विषय भोगों में लगाकर जीवन की सार्थकता को स्वयं ही नष्ट कर देते हैं। अप्रत्यक्ष अज्ञानता में जो त्रुटियां हैं, वह तो ठीक हैं। पर जानबूझकर भी गलती या अपराध करना इंसानियत नहीं पशुता है। कब, कौन सा कार्य, कर्म पूरे जीवन को सार्थक कर दे। इसलिए हमें अधिक से अधिक परोपकार और भलाई के कार्य करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा जैसे बच्चा पढ़ाई करता है तो उसके सिर में दर्द होने लगता है, उसी प्रकार जब कर्म उदय में आता है तो व्यक्ति अपने आप को संभाल नहीं पाता।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी

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