मुनि 108 श्री निर्वेग सागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश गर्मी की तपिश से ज्यादा जो शरीर में अंदर की तपन ओर त्याग को जीत लेता है वह अपने जीवन को जीत लेता है, मुनिश्री
झुमरीतिलैया-
जिनकी चर्या तप और त्याग झलकता है ऐसे संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 मुनि श्री 108 निर्वेग सागर जी महाराज,मुनिश्री 108 शीतलसागरजी महाराज, ऐलक श्री 105 निजानंदसागरजी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश आज दिनांक 20.4 को झुमरीतिलैया कोडरमा धर्म नगरी में हुआ।
ज्ञात हो जैन मुनि इस भीषण गर्मी में जहां लोग धूप में निकलने को सोचते हैं ऐसे समय में मुनि श्री नंगे पैर गया नगरी से पद विहार करते हुवे राजगीर, पावापुरी,नवादा होते हुए लगभग 200 किलोमीटर की पद यात्रा करते हुवे यहां पहुँचे।
जहाँ शहर के मुख्य द्वार पर शहर के समाज के सभी पदाधिकारी गण महिला वर्ग, समाज के पदाधिकारी गण ने गाजे-बाजे के साथ आगवानी की। नगर भ्रमण करते हुए बड़ा जैन मंदिर जी पहुंचे जहां पर देवाधिदेव 1008 आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर मुनि श्री के मुखारबिंद से विश्व शांतिधारा हुई। शांति धारा करने का सौभाग्य जैन अजित गंगवाल, जैन संजय गंगवाल के परिवार को प्राप्त हुआ । इसके बाद मंगलाचरण जैन सुबोध गंगवाल ने किया ओर दीप प्रज्वलन समाज के पदाधिकारी गण द्वारा किया। ओर मुनि संघ को ग्रीष्म कालीन प्रवास के लिए श्री फल भेट कर निवेदन किया गया।
मीडिया प्रभारी नवीन जैन जैन,राज कुमार अजमेरा ने बताया की इसके बाद मुनि श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि यह गर्मी तपन तप रही है गर्मी की तपिश से ज्यादा जो शरीर में अंदर की तपन ओर त्याग को जीत लेता है वह अपने जीवन को जीत लेता है। आगे कहा कि यह कोडरमा एक धर्म नगरी है जहां बहता योगी रमता पानी कहावत के अनुसार जैन संत सम्मेद शिखर जाने के क्रम में यहां पर आगमन हो जाता है यह कोडरमा वाले का बहुत सौभाग्य है। समाज के पदाधिकारी गण ने साथ चल रहे लोगों का स्वागत माला दुप्पट्टा पहनाकर किया ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
