संसार के कार्यो मे रुचि तो है लेकिन दान धर्म कार्यो मे रुचि नहीं है सुधासागर महाराज
यशोदय तीर्थ महरोनी*
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव108 श्री सुधासागर महाराज ने प्रवचन मे कहा की बेमन से हो तो भी धर्म करना।
उन्होंने कहा-हम अपनी जिंदगी में रात्रि भोजन नही छोड पा रहें,हमने किसी एक व्यक्ति को रात्रि भोजन छुडा दिया तो हमे पुण्य लगेगा, हम दान नही दे सकते तो हम किसी को प्रेरणा देकर एक मंदिर आदि बनवा सके, किसी एक को जिसने मंदिर बनाया है उसका समर्थन करे तो हम पुण्य कमा सकते है।
पूज्य श्री ने कहा की-हम पूजा तो करते हैं लेकिन भाव पूर्वक नहीं कर पाते,ऐसे जो भी क्रिया मन नही हो तो भी वह क्रिया करो, इसका उदाहरण देते हुए कहा जैसे नोकरी करने वाला नोकरी करने बेमन से जाता है.यदि उसकी छुट्टी हो जाए तो खुश होता हैं बेमन से नोकरी जाता हैं तो भी मजदुरी वेतन तो मिलेगा ही मिलेगा,ऐसे ही जैसा बने बेमन से क्रिया करो आपको पुण्य लगेगा।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा की संसार के कार्यो मे रुचि तो है लेकिन दान धर्म कार्यो मे रुचि नहीं है तो हमें लक्ष्मी अभिशाप देती हैं।हमने अतीत मे अच्छे कार्य क्रिया इसलिए हमे जैन धर्म मिला,आज हम गरीब है तो पुर्व जन्म के व्यसनी,पापी,लक्ष्मी का दुरुपयोग किया।यदि अमीर हुए तो हमने धन को धर्म में लगाया इसलिए अमीर हुए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
