धर्म आनन्ददाता है जिसमें | आनंद न मिले वह धर्म नहीं चन्द्रप्रभ सागर महाराज

धर्म

 

धर्म आनन्ददाता है जिसमें | आनंद न मिले वह धर्म नहीं चन्द्रप्रभ सागर महाराज

अमरकंटक

नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक मे सर्वोदय तीर्थ पर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज सानिध्य मे भव्य
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न होने जा रहा है सोमवार की बेला मे , प्रथम दिन गर्भकल्याणक की क्रियाएं संपन्न हुयी मंगलवार की बेला मे भगवान का जन्मकल्याणक़ महोत्सव मनाया जाएगा इसके साथ ही सोमवार की अनुपम बेला मे विशेष पात्रो की एवम आयोजन मे सम्मलित  इंद्र इंद्राणियों की शुद्धि की गई यह समस्त आयोजन प्रतिष्ठाचार्य बालब्रम्हह्मचारी विनय भैया के निर्देशन मे हो रहा है

 

इस अवसर पर धर्म सभा को त्याग तपस्या की जीवंत मूर्ति पूज्य मुनि श्री 108 चन्द्रप्रभसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया उन्होने कहा की  आत्मा का स्वभाव ही धर्म है और धर्म आंनंददाता है। जिसमें
| आनंद न मिले वह धर्म नहीं निर्लिप्त आत्मा का ही  निर्वाण होता है। पंचकल्याणकमहोत्सव आपको शुद्धि का अवसर देता हैकोई किसी को ज्ञान नहीं दे सकता, ज्ञानसबके भीतर है केवल उसे अनावृत करना है। हमारे बोल आवरण को हटाने के निमित्त हो सकते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

पूज्य मुनिश्री चंद्रप्रभ सागर महाराज  ने कहा कि मोह का क्षय हो जाना ही मोक्ष है। पूज्य की पूजा पूजक को एक दिन पूज्य बना सकती है। इस अवसर परनिर्यापक श्रमण श्री प्रसाद सागर महाराज ने कहा की जिसे केवल सपना देखना है उसेरात छोटी लगती है और जिस सपना पूराकरना है उसे दिन छोटा लगता है। सपने तो
सब देखते हैं मगर पूरे कुछ ही कर पातेहैं महापुरुषों के सपने पूरे हो जाते हैं,उन्होने कहा जब भगवानआदिनाथ जब मां के गर्भ में आये उसकेपहले माता मरुदेवी ने सपने देखे और भगवान आदिनाथ माता के सब सपने सुफलकर सिद्यालय चले गये।

 

 

मुनि श्री प्रसादसागर महाराज ने आचार्य श्री विद्यासागरमहाराज रचित पंक्तियां दिन का हो या रात
का सपना सपना होय, सपना अपना सा लगेपर न अपना होय। कितनी यात्रा हमने की हैं और कब तक करना है। मुक्ति की भूमिकाबनाने पाषाण से भगवान बननेप्रक्रिया समझ लेना चाहिए और आचारविचार तद्नुरूप करना आरंभ कर दें। आपनेकहा कि ज्ञान स्वप्रकाशी है, रात में आमनेसामने के वाहन एक दूसरे को वाहन के प्रकसे परस्पर समझ जाते हैं और यात्रा आगेचलती रहती है। महापुरुषों के ज्ञान के प्रकाशको समझ कर हम भी अपनी यात्रा करसकते हैं। चार सौ दिन हो गये विश्व में युद्धचल रहा है। दो देश लड़ रहे हैं और हम विश्वशांति के लिये ये अनुष्ठान कर रहे हैं।अंदर आग जल रही है हमारा प्रयास मन की शांति का होना चाहिए।

 

 

सर्वोदय तीर्थ पंचकल्याणक समिति प्रचार प्रमुख वेदचन्द जैन ने अमरकंटक सेये जानकारी देते हुये बताया कि इस


पंचकल्याणक महोत्सव में ग्यारह सौ सेअधिक जिनबिम्बों की प्रतिष्ठा जा रहीहै। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के
स्वास्थ्य में तीव्रता से सुधार हो रहा है। देशभर के चिंतिंत जनों को श्री जैन ने आश्वस्तकरते हुये कहा कि देश भर में की प्रार्थनाओं और आचार्य श्री के आत्मबल से स्वस्थ होते हुये आज उनकी आहाRचर्याउल्लासपूर्वक संपन्न हुई और कुछ
मिनटों तक श्रद्धालुओं को दर्शन दिये।

 

ज्ञातहो कि दिगंबर जैन साधु उपचार के लियेकिसी भी प्रकार की औषधि या चिकित्सा
का सहारा नहीं लेते। कष्ट को सहकर अपनेकर्मों की निर्जरा कर स्वमेव स्वस्थ हो जाते
हैं।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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