पुण्यशाली समाज को परंपरा से सभी आचार्यों के चातुर्मास का अवसर मिलता है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 2 अप्रैल को 21 वर्षो के बाद संघ का मंगल प्रवेश संभावित
उदयपुर
वर्ष 2002 में संघ ने उदयपुर में चातुर्मास किया। काफी वर्षों से उदयपुर के समाज को आस एवं प्यास लगी रही 21 वर्षों से आप इंतजार कर रहे हैं मेवाड़ और बागड़ की जनता समाज सौभाग्यशाली है कि परंपरा के सभी आचार्यों के चातुर्मास इस धरती पर हुए हैं ।
आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने ने यह मंगल देशना वर्धमान फार्म हाउस गुड़ली में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने आगे बताया कि आचार्य श्री शांतिसागर जी ने उदयपुर में चातुर्मास किया उनके साथ श्री वीर सागर जी मुनि रूप में रहे हैं उन्होंने भी चातुर्मास किया है

आचार्य श्री शिव सागर जी ने, आचार्य श्री धर्म सागर जी ने, आचार्य श्री अजीत सागर जी ने यहां चातुर्मास किया और उन्हें आचार्य पद भी उदयपुर में ही मिला और हमने भी वर्ष 2002 में उदयपुर में चातुर्मास किया है।

उन्होंने कहा उदयपुर की समाज बहुत सौभाग्यशाली है कि उन्हें परंपरा के सभी आचार्यों का योग संयोग से अवसर मिला है ऐसा अवसर पुण्य शाली समाज जनता को मिलता है। श्री गजू भैय्या एवम परमीत जैन ने बताया कि दिनांक 27 मार्च को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने वर्धमान फार्म हाउस कारवा परिसर गुडली से विहार किया संघ की आहार चर्या श्रम सेवालय गोवल में संपन्न हुई ।दोपहर को विहार कर रात्रि विश्राम श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर देबारी में होगा। यहां अल्प विश्राम की संभावना है।
राजेश पंचोलिया इंदौर के अनुसार उदयपुर सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत एवम् पारस चितोडा मीडिया प्रभारी ने बताया कि आगामी 2 अप्रैल को पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिघि108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का उदयपुर शहर में 21 वर्षो के बाद 8 मुनिराजो,19 आर्यिका माताजी 2 क्षुल्लक एवम् एक क्षुल्लिका माताजी सहित भव्य मंगल प्रवेश होगा।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
