आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का वर्ष 2016से जुड़ा संस्मरण
यह क्षण थे वर्ष 2016के जब आचार्य श्री कुंडलपुर में विराजमान थे
मै कुछ संस्मरण प्रस्तुत कर रहा हु जो स्वयम मैने सुना।
बात उस समय की हम रामगंजमंडी राजस्थान आचार्य श्री और बडे बाबा के दर्शनार्थ कुण्डलपुर दिनाक 21-6-2016 को गये वहा भक्तो का अपार मेला देखने को मिल रहा था ज्ञात हुआ 69 बसे सागर से आचार्य श्री को निवेदन हेतु आई है लगभग 5000 लोग सागर के वहा मोजूद थे। आचार्य गुरुवर के पूजन का वक़्त आया पूजन पाद प्रक्षालन सागर नगर के भक्तो को ही प्राप्त हुआ सागर नगर की और से समाज के वरिष्ठ सदस्य ने अपना भाव भीना निवेदन करते कहा है गुरुवर हम कही वर्षो से सागर नगर वासी प्यासे है है गुरुवर इस पिपासा को शांत करे और वर्ष 2016 का वर्षायोग कर हमको प्रदान करे।

समय बीता आचार्य श्री ने अपना मंगल 5 मिनट अपना उदबोधन दिया आचार्य ने मंद मंद मुस्कान लेते कहा हम प्यासे है आचार्य ने कहा जो स्वयम सागर है वहा भक्ति का सागर वोह प्यासा कैसे हो सकता है?

तभी कुछ भक्तो ने कहा सागर मे अगर महासागर आ जाये तो अद्भुत होगा तभी तालियों की जय जय गुरुदेव की गूंज सुनाई थी। तभी आचार्य श्री ने विनम्र भाव से कहा अपनी प्यास को और अभी आपके पुण्य की प्यास अधूरी है इसे और बढाओ और अपने पुण्य को और गाढा करो ऐसी अमृत पीयूष वाणी सुन मन पुलकित हो उठा।
अ वर्षायोग अमृत सागर धारा कहा बहेगी ये तो भविष्य के गर्भ मे विद्यमान था। लेकिन महासागर विद्यासागर गुरुदेव ने कुछ दिन बाद सागर की और कदम बढा दिए। और सागर की भक्ति की प्यास को उन्होंने पूर्ण किया।
सचमुच गुरुवर तो गुरुवर है उनकी महिमा अपरंपार है।
संस्मरण लेखन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
