27 किलोमीटर की सम्मेद शिखर की पर्वत वंदना से पूज्य गुरु मां विशुद्ध मति माताजी 27 किलोमीटर दूर
📍गिरिडीह
यह भी एक अनुपम सहयोग है यह सम्मेद शिखर तीर्थ की पर्वत की वंदना 27 किलोमीटर की होती है और पूज्य गणिनी गुरु मां विशुद्ध मति माताजी संघ सहित अपनी जन्मभूमि ग्वालियर से लगभग 12 सौ किलोमीटर का पद विहार कर सम्मेद शिखर तीर्थ से अब लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर है पूज्य गुरु मां गिरिडीह के दिगंबर जैन मंदिर में विराजित हैं।
पर्वत की वंदना 27 किलोमीटर की है और गुरु मां की मंजिल भी अब लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर रह गई है। अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए पूज्य गुरु मां के साथ उनकी परम विदुषी शिष्या प्रज्ञा पद्मिनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने पूरी कुशलता के साथ गुरु मां की सेवा में संलग्न रहते हुए इस यात्रा का कुशलता पूर्वक संचालन किया।
वही संघपति श्रीमान कैलाश जैन खेड़ा वालो ने इसका निर्देशन बखूबी किया। पूज्य माता जी की उम्र इतनी अधिक है लेकिन उनका साहस उनकी साधना उनका संबल उन्हें इस लक्ष्य पर लाया है।

पूज्य गुरु मां ने सदा ही हमेशा सद कार्यों की ओर अपनी प्रवृत्ति रखने की प्रेरणा दी है। पूज्य गुरु मा ने संघ में सदा अनुशासन साधना व लक्ष्य की और केंद्रित रहने की सीख सभी को प्रदान की है। भक्तों पर भी गुरु मां की आशीष की छांव सदा बरसती है।


आया है पावन दिन भक्ति की ओर
गुरु मां के बस कुछ ही कदम पहुंच रही हैं सम्मेद शिखर तीर्थ की ओर
चर्चा का शोर चारो और
बस बढ़ चले गुरु मां के कदम सम्मेद शिखर की ओर
12 सौ किलोमीटर का पद विहार किया
बाबा पारस के चरणों में पहुंचने का लक्ष्य पूर्ण किया
उदित जैन ग्वालियर से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंज मंडी
