जैन समाज के कोहिनूर अनमोल श्रीमान अशोक जी सुशीला पाटनी आर के मार्बल के विवाह के 49 वर्ष पूर्ण
हम ऐसे व्यक्तित्व के बारे में लिखना चाहते हैं जिनके बारे में जितना लिखा जाता है हमेशा कम पाया जाता है लेकिन ऐसे व्यक्तित्व के गुणों का बखान शब्दों की सीमा को असीमित करता है।
हम बात कर रहे हैं ऐसे व्यक्तित्व की जो उद्योगपति होने के साथ सामाजिक आर्थिक वह हर क्षेत्र में अपनी सेवाएं समाज को देते रहे हैं व्यक्तित्व हैं जैन गौरव रत्न अभिनव चामुंडराय, दानवीर भामाशाह उदारमना व्यक्तित्व श्रीमान अशोक सुशीला पाटनी आरके मार्बल जो ना केवल अपने व्यवसाय, पारिवारिक दायित्वों को कुशलता पूर्वक निर्वहन के साथ संत सेवा में सदा तत्पर दिखाई देते हैं आज संपूर्ण जैन जगत की नहीं अपितु समस्त जन इन्हें दांपत्य जीवन के 49 वर्ष पूर्ण होने पर शुभकामनाएं प्रेषित कर रहे हैं।

ऐसे व्यक्तित्व समाज को एक नई दिशा देते हैं समाज को एक प्रेरणा देते हैं और समाज में एक नया आयाम स्थापित करते हैं मैंने दोनों को बहुत नजदीक और करीब से देखा है और उनके व्यक्तित्व को देखा है किसी प्रकार के राग रंग से यह पड़े हैं और सदा संतों की सेवा में लगे रहते हैं भवानी मंडी में जब आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज का मंगल आगमन हुआ तब श्री पाटनी लगभग 3 किलोमीटर तक ध्वज लेकर नंगे पैर चलते हुए पूज्य गुरुदेव के साथ चलते दिखाई दिए यह इनके व्यक्तित्व को दर्शाता है साथ ही सेवा का जो इनका कार्य है वह सदा हर किसी को यही एक मिसाल देता है कि हम कितनी ऊंचाई पर चले जाएं लेकिन विनम्रता हमारे जीवन को उन्नत बनाती है।
संतों की सेवा के प्रति इनका भाव है वह इनको उदार मना व्यक्तित्व की संख्या देता है।


इनसे जुड़ा वाकया
जब पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज इनके निजी ऑफिस पर पहुंचे तब महाराज श्री ने इनकी फाइलों को चेक कर लिया तब लगभग हजारों की संख्या में फाइलों में स्कॉलरशिप वाले छात्रों के नाम लिखे हुए थे तब महाराज श्री ने बयां किया और उनसे कहा तो उन्होंने कहा कि मेरा तो काम ही अब सेवा का है और जितना मेरा किया हुआ सब के काम आ सके यही मेरे जीवन का ध्येय है।

आपने हाल है आपके जन्मदिवस पर तिहरा लाभ अर्जित किया एक तो उस दिन किशनगढ़ में जन्म कल्याणक मनाया गया वही इनका जन्मदिन था। तीसरा इन्होंने पूज्य श्री के पाद प्रक्षालन का स्वर्णिम अवसर भी प्राप्त किया। इन्होंने अपने उद्बोधन में जो कहा वह यह बताता है कि संसार नश्वर है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से आशीर्वाद लेते हुए उन्होंने कहा कि महाराज श्री मुझे ऐसा आशीर्वाद दीजिए कि मैं भी मोक्ष मार्ग पर बढ़ सकू। आपका जब भवानीमंडी जैन समाज द्वारा अभिनंदन किया जा रहा था तब मैं उस समय वहां मौजूद था तब समाज जन द्वारा उनका अभिनंदन किया जाने लगा तो उन्होंने कहा कि मैं सम्मान नहीं लेता इतना विशाल व्यक्तित्व हर किसी का नहीं हो सकता है। बहुत कहने पर इन्होंने सिर्फ श्रीफल समाज की ओर से ग्रहण किया। जीवन को समाज को समर्पित करने वाली यह दंपत्ति अपने आप में एक विशालता को लिए हुए हैं।
इन्हें हम समाज का कोहिनूर कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। परम आदरणीय श्रीमान पाटनी और त्याग की मूर्ति सयम व्रत के धारी पांच प्रतिमा धारी श्रीमती सुशीला पाटनी को वैवाहिक वर्षगांठ अनंत शुभकामनाएं प्रेषित करते है।

बस प्रभु से यही कामना करते हैं इन दोनों का जीवन दीर्घायु और चिरायु हो। एवं इसी तरह जैन धर्म की पताका को लहराते रहे।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
