केपाटन में आर्यिका स्वास्तिभूषण माताजी ने प्रवचन में शब्दों की शक्ति पर दिया संदेश शब्दों का प्रभाव गहरा, भाव बदल देता है उनका असरः स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
अतिशय क्षेत्र में मंगलवार को आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने प्रवचन में कहा कि शब्द हमेशा संभल कर बोलना चाहिए। शब्दों के हाथ पांव नहीं होते, लेकिन उनका असर बहुत गहरा होता है।
उन्होंने बताया कि किसी को बुलाने या बताने में कभी व्यंग्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि शब्द पढ़ना आए या न आए, लेकिन बोलना हर किसी को आता है। एक शब्द औषधि का काम करता है और एक शब्द घाव देने का काम करता है।

माताजी ने कहा कि शब्द का ज्ञान मनुष्य को ही प्राप्त है और संसार में मनुष्य के लिए मोक्ष, स्वर्ग, नरक मनुष्य ही उत्कृष्ट प्राणी है। और त्रियंच सभी स्थानों के द्वार खुले हुए हैं। शब्द तो वही रहते हैं, केवल भाव बदल जाते हैं। जब स्वर और व्यंजन मिलते हैं तभी शब्दों में स्वाद आता है, जैसे भोजन में जब तक घी, तेल, मिठास और रस न हो तब तक उसका स्वाद नहीं आता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भोजन प्रेम और प्रसन्नता के भाव से परोसा जाए तो अतिथि उसे प्रसन्नता से ग्रहण करता है और वह भोजन उसके लिए पौष्टिक और गुणकारी होता है, लेकिन यदि वही भोजन अपमान के भाव से दिया जाए तो व्यक्ति मजबूरी में खा तो लेता है, लेकिन वह उसके लिए न तो पौष्टिक रहता है और न ही लाभकारी होता है।



लेखन से स्वभाव व प्रवृत्ति का अनुमान लगता है
माताजी ने कहा कि जिस प्रकार किसी महिला के पास आटा, चावल, दाल, चीनी जैसी सामग्री हो, लेकिन उसे बनाना न आता हो तो वह सामग्री व्यर्थ हो जाती है। उसी प्रकार शब्द, स्वर और व्यंजन होने के बाद भी उनका सही उपयोग न आए तो वे बेकार हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति के लेखन से भी उसके स्वभाव और प्रवृत्ति का अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शब्द एक बड़ी शक्ति हैं। जैसे बिना बंदूक के गोली कुछ नहीं कर सकती, लेकिन बंदूक में रखकर चलाई जाए तो वह चोट पहुंचा देती है। उसी प्रकार शब्द यदि क्रोध और कषाय के साथ प्रयोग किए जाएं तो वे मन में घाव पैदा कर देते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि जैसे अच्छी गृहिणी स्वादिष्ट भोजन बना लेती है, वैसे ही ज्ञानी व्यक्ति शब्दों को भी सही रूप में प्रयोग करना जानता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
