पोते की भावनाओं को देखते हुए दादा ने करवाया ढाई करोड़ की लागत से प्रदेश का सातवां 70 फीट ऊंचा जैन तीर्थ
सागर
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध जिला सागर में स्थित मंगल गिरी पर्वत पर नंदीश्वर दीप का निर्माण चल रहा है जिसके इतिहास कहानी पर नजर डाली जाए तो बहुत ही रोचक नजर आती है। इस नंदीश्वर दीप का निर्माण 9 साल के पोते ने अपने दादा से निर्माण कराने का आग्रह किया। दादा भी पोते की भावनाओं को देखकर इसका निर्माण करने की लिए अग्रसर हो गए। लगभग ढाई करोड़ रुपए की लागत से बन रहे इस नंदीश्वर दीप का निर्माण अगले वर्ष तक पूर्ण होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह मध्य प्रदेश राज्य का सातवां नंदीश्वर दीप है। अगर नजर डालें तो सबसे बड़ा नंदीश्वर दीप 100 फीट ऊंचा है जो भोपाल में है। इसके साथ ही जबलपुर, पपौरा जी, सोनागिर तीर्थ, भिंड एवं खनियाधाना में नंदीश्वर दीप निर्मित हैं।

मंदिर निर्माण के पुण्यार्जक प्रमोद जैन ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2019 में आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज सागर जिले के शाहगढ़ में पधारे यहां हमारे परिवार सहित हम उनके दर्शन हेतु गए। मंदिर की धर्मशाला जिस जगह आचार्य श्री विराजमान थे वहां पर मेरा पोता ईशान उनके दर्शन हेतु अकेला ही चला गया। आचार्य भगवंत तो विनम्रता की प्रतिमूर्ति हैं। उसे बालक की श्रद्धा भावनाओं को मानव लग रहा था कि वह उसे पढ़ रहे हो। आचार्य श्री जब हम गुरु जी के दर्शन करने पहुंचे तो आचार्य भगवंत उससे बात कर रहे थे। और हमने आचार्य श्री से पूछ लिया तो आचार्य श्री ने ईशान के लिए कहा कि यह बालक तो धार्मिक प्रवृत्ति का है। और इस भवन में नंदीश्वर दीप की प्रतिकृति देखकर उसके विषय में मुझसे पूछ रहा था। उसकी जिज्ञासा को मैंने पूर्ण किया है। इस बालक ने लौटते समय अपने दादा से कहा कि दादाजी नंदीश्वर दीप इस देश में कम ही है। सागर में क्यों नहीं है? एक बनवा दीजिए। उसकी श्रद्धा भावनाओं को देख आचार्य श्री स्वयं भी मुस्कुरा दिए। उसके उपरांत मैंने भी आचार्य श्री के आशीर्वाद से धर्म के लिए और पोते की इच्छा भावनाओं को पूर्ण करने के लिए नंदीश्वर दीप जिनालय बनवाऊंगा। इसका शिलान्यास फरवरी 2020 में हुआ। लेकिन कोविड काल के कारण इसका कार्य प्रभावित हुआ। अब इसका कार्य अनवरत जारी है। 2024 में यह तैयार हो जाएगा।

नंदीश्वर दीप कैसा होगा इसका विवरण

सागर के मंगल गिरी तीर्थ पर इसका निर्माण चल रहा है जो लगभग पूर्ण नेता की ओर अग्रसर है यह 70 फीट ऊंचा है और 70 फीट चौड़ा है इसमें ढोलक के आकार के 52 जैन मंदिर बनेंगे। इसके साथ ही 5 मेरु पर्वत में 80 प्रतिमाएं विराजित रहेगी। 20 गजदंत बनेंगे। इन्हीं पर मेरु पर्वत खड़े होंगे। जिसमें 152 प्रतिमाएं विराजमान होंगी। इनमें से 100 बनकर तैयार हो चुके हैं।
भगवान भरत की सबसे ऊंची प्रतिमा विराजमान है
नंदीश्वर दीप के निर्माण हेतु कई जगहों का निरीक्षण किया गया जिसमें पपौरा जी, नैनागिर जी, को देखा गया लेकिन इसके उपरांत इसका चयन मंगलगिरी हुआ। पूज्य आचार्य भगवंत विशुद्ध सागर महाराज की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से भगवान भरत की विश्व की सबसे ऊंची 45 फीट की प्रतिमा स्थापित की गई है। यह प्रतिमा हजारों वर्षों के लिए जैन समाज के लिए वह सागर की एक धरोहर बन गई है। यहां इसीलिए नंदीश्वर दीप का निर्माण किया गया है कि लोग भक्त जब भगवान भरत के दर्शन करने पहुंचे तो नंदीश्वर दीप के भी वे दर्शन कर सके।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
