आचार्य श्री विमर्श सागर महाराज संघ का बकस्वाहा मैं हुआ मंगल प्रवेश जिनागम में आत्मा के कल्याण का जो मार्ग बताया गया है वह मार्ग अर्थात पंथ जिनागम पंथ है विमर्श सागर महाराज
बकस्वाहा
जीवन है पानी की बूंद के रचियता पूज्य आचार्य श्री विमर्श सागर महाराज का संघ सहित नगर में मंगल आगमन हुआ। इसी के साथ आचार्य विबुद्ध सागर महाराज का भी मंगल आगमन हुआ।
नगर के पारसनाथ जिनालय में पूज्य आचार्य श्री विमर्श सागर महाराज ने अपनी स्वरचित जीवन है पानी की बूंद को अपने मधुर स्वर से सभी के बीच कहीं। इसके साथ उन्होंने कहा कि सबसे प्यारा जैन धर्म, अनुभव करते मिटे भरम। जैन धर्म के पालन से मिले सोख्य नीचे आत्म परम। मेरे ग्रंथ गुरु विनय निजी धर्म ना पाए रे जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए रे, होनी अनहोनी कब क्या घट जाए रे।

पूज्यश्री ने जिनागम पंथ का आशय सभी को समझाते हुए कहा कि जिनवाणी को ही जिनागम कहते हैं, और जीना गम में आत्मा के कल्याण का जो मार्ग बताया गया। वह मार्ग अर्थात पंथ जिनागम पंथ है।

तीर्थंकर भगवान महावीर ने बताया कि वस्तुओं के स्वभाव का नाम ही धर्म है। क्षमा, दया, रत्नत्रय यही जैन धर्म का सार है। उन्होंने ताकि हमें इस पर गौरव होना चाहिए कि हमारे हमें छन्ना प्रदान किया। उन्होंने इसका उपयोग बताते हुए कहा कि इसका प्रयोग पानी जानने के लिए किया जाता है और प्रत्येक जैन परिवार में छन्ना होने का अर्थ यह है कि वह दया धर्म का पालन करते हैं। जैन धर्म का अर्थ ही दया धर्म है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
