सम्यक दर्शन बिना गुरु के नहीं मिल सकता ऐलक धैर्य सागर महाराज
सागर
सम्यक दर्शन के बिना हम संसार से पार नहीं हो सकते और सम्यक दर्शन बिना गुरु नहीं मिलता। क्योंकिआचार्यों ने लिखा है कि पांच लब्धियो का होना जरूरी है। जिसमें से देशना लब्धि गुरु के पास होती है। गुरु की पहचान करना जरूरी है। गुरु आंख बंद करके स्वीकार नहीं करना चाहिए।और जब गुरु को स्वीकार कर लो तोउस पर संदेह नहीं करना चाहिए।तभी देशना लब्धि की प्राप्ति होती है।
यह उद्गार ऐलक 105 धैर्यसागर महाराज ने दीक्षा दिवस पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए गुरु के प्रति अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि बिना गुरु के तुम्हारा कल्याण नहीं हो सकता।उन्होंने इस पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य कुंदकुंद स्वामी नेअष्ट पाहुड़ ग्रंथ में कहा है कि जिसके जीवन में रत्नत्रय नही है, उसका जीवन चलते-फिरते मुर्दे के समान है।

मुनि श्री 108 पूज्यसागर महाराज के संघस्थ ऐलक 105 श्री धैर्यसागर महाराज और आर्यिका 105 विलक्षणमति माताजी का दीक्षादिवस अंकुर कॉलोनी जैन मंदिर
प्रांगण में मनाया गया। इससे पहले
सुबह 8:30 बजे मुनिसंघ का अंकुर
कॉलोनी में प्रवेश हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
