गुरु भक्ति से मुक्ति मिलती है आचार्य कनकनंदी

धर्म

गुरु भक्ति से मुक्ति मिलती है आचार्य कनकनंदी
भीलुडा
सिद्धांत चक्रवर्ती वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव का दीक्षा दिवस भीलुड़ा शांतिनाथ जिनालय में 3 दिन तक मनाया गया। मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी ने “जब तक जीव कुज्ञानी होते तब तक स्वयं को महा ज्ञानी मानते” इस कविता से मंगलाचरण किया। वेबीनार में पुनर्वास कॉलोनी की दीपिका जैन, सागवाड़ा की सुरुचि जैन, मुंबई से महावीर जैन, कलावती जैन ,मुंबई से डॉ रीता, सागवाड़ा से अनल, पुनर्वास कॉलोनी से जयश्री जैन, कोटा से महावीर जी आदि ने आचार्य श्री का गुण स्मरण करके आचार्य श्री की भक्ति की।

 

शुद्ध जैन भोजन के साथ यात्रा

 

 

शुद्ध जैन भोजन के साथ यात्रा

आचार्य श्री कनक नंदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया कि गुरु भक्ति से मुक्ति मिलती है। स्वयं के गुण बढ़ाने के लिए गुरु भक्ति की जाती है। गुरु भक्ति संसार समुद्र से पार कराती है। गुरु भक्ति से जन्म मरण नष्ट होते हैं। 8 कर्मों को नष्ट करने के लिए गुरु भक्ति की जाती है। गुरु ज्ञान दर्शन के नायक होते हैं तथा चारित्र व मोक्ष मार्ग को देने वाले होते हैं। अंतस से गुरु भक्ति तथा गुण पूजा से संधान होता है। आत्मा से परमात्मा को जोड़ना संधान कहलाता है। वंदे तद्भगुण लब्धये के भाव से भक्ति पूजा करनी चाहिए। बिना पुण्य के सच्चे गुरु भी नहीं मिलते हैं। अनंत वैभव प्राप्त करने योग्य भाव होने चाहिए।

 

 

 

 

 

 

 

आध्यात्मिक गुणों को परिष्कृत धर्म के माध्यम से किया जाता है आध्यात्मिक गुण जो विकृत हो गए हैं वह धर्म के माध्यम से सुदृढ़ हो जाते हैं। बाह्य तप से असंख्यात गुना अंतरंग तब श्रेष्ठ है। प्रायश्चित विनय वैयावृत्य से गुण परिणमन होता है।

श्रद्धां, वात्सल्य, पात्र दान सातिशय पुण्य बंध होता है। अध्यात्मिक गुण बढ़ते हैं। चेतन मन में होता है वह अवचेतन मन में जाता है अवचेतन मन से प्रभावित होकर कार्य होता है।

विजयलक्ष्मी जैन से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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