अंतरमना प्रसन्न सागर महाराज जी ने यह साबित कर दिया है कि हिंसा की कोई जगह नहीं है पुरुषोत्तम रुपाला

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अंतरमना प्रसन्न सागर महाराज जी ने यह साबित कर दिया है कि हिंसा की कोई जगह नहीं है पुरुषोत्तम रुपाला
पारसनाथ
पूज्य गुरुदेव प्रसन्न सागर महाराज के महापारणा महोत्सव कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला पधारे उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि एक तरफ जहां दुनिया विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है, वर्तमान के हालात विश्व युद्ध की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। वही तपस्वियो की धरती पारसनाथ अहिंसा और विश्व शांति का संदेश दे रहा है। जो हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।

 

उन्होंने अंतरमना प्रसन्न सागर महाराज के विषय में बोलते हुए कहा कि उन्हें अपनी तपस्या साधना से यह साबित कर दिखाया है कि हिंसा की कोई जगह नहीं है अहिंसा के जरिए भी बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।

महोत्सव की व्यवस्था को देख मंत्री बहुत ही गदगद दिखाई दिए कहा की मेरे जीवन का आज सर्वोत्तम दिन है खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि ऐसे भगवान का साक्षात दर्शन करने का मौका मिला है। भारतवर्ष का अमृत महोत्सव का प्रारंभ अमृत काल से हुआ है। हमारा भारत संतों के आशीर्वाद से ही शक्तिशाली बन चुका है।

णमोकार मंत्र की जो आपके साथ अंतर्मना ने अपना पारणा किया
557 दिनों की उत्कृष्ट तप और साधना अंतर्मना प्रसन्न सागर महाराज की शनिवार को पूर्ण हुई। पूज्य आचार्य प्रवर स्वर्णभद्र टोंक से नीचे आए। साधना पूर्ण होने के बाद जैसे ही गुरुदेव तलहटी पर पहुंचे तो उनका ऐतिहासिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर जो चाह देखने को मिल रहा था वह कल्पना से परे दिखाई दे रहा था। वही गुणायतन के मुख्य द्वार पर पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने भी उनकी तपस्या की अनुमोदना की। भक्तों द्वारा जयकारों के बीच उन्हें मुख्य पांडाल लाया गया। और उन्हें अपने आसन पर बिठाया।

 

 

 

 

 

 

लगभग 2:34 पर णमोकार मंत्र की जाप के साथ पूज्य गुरुदेव ने पारणा कर अपनी साधना को पूर्ण किया। इस अवसर पर भक्त भावविभोर दिखे सभी ने तालियों की गड़गड़ाहट करते दिखाई दिए।


साधना के काल की तीन बातों का महाराज श्री ने उल्लेख किया इन तीन बातों में उन्होंने कहा
मन पर भरोसा मत करो, कब बदल जाए, कहा नहीं जा सकता।
अपनी श्वास पर भरोसा मत करो, कब छूट जाए पता नहीं
अपने पुण्य पर भरोसा मत करो, इसे जितना बढ़ा सको बढ़ाओ, न जाने कब पाप आ जाए पता नहीं।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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