सोने के घर ब नाने वाले पछताते हैं मन्दिर वनाने वाले अमर हो जाते हैं–सुनील सागर जी

धर्म

सोने के घर  ब नाने वाले पछताते हैं मन्दिर बनाने वाले अमर हो जाते हैं–सुनील सागर जी

जयपुर–

विकारों का वमन हों रहा है यदि विकारों का वमन नहीं हो रहा तो समझ लेना कि अपने को सही मार्ग मिला ही नहीं है। सोने के घर बनाने वाले पछताते हैं। और सोने के मन्दिर बनाने वाले भव से पार हो जातें हैं। सोने में ही जिंदगी गवा रहें हैं निंद्रा को राक्षसी कह है सौ साल में से पचास वर्ष तो सोने में ही निकल जाते हैं फिर खाने पीने में निकल जाते हैं विद्या को पाने की चाह नहीं आचार्य श्री विद्यासागर महाराज बनने की चाह रखे। अपनी मति को सन्मति बना कर सन्मति सागर बने। सुधा को पाने श्री सुधा सागर बनकर अपने जीवन का कल्याण करें।
ये दुर्लभ पर्याय मिलीं हैं इसको जानना है, जैन समाज को शान्ति प्रिय कहा जाता है।हम ही है। शान्ति प्रिय इसका सम्मान होना चाहिए। और शिखर जी का कोई हल निकलना चाहिए उक्त सांगानेर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने व्यक्त किए।

इसके पहले धर्म सभा का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ सभा के प्रारंभ बड़े बाबा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा अशोक नगर विकास जैन प्रवीण बड़जात्या जयपुर ने किया व आचार्य श्री सुनील सागर ज महाराज को शास्त्र भेंट किए। अतिथियों का सम्मान कमेटी के अध्यक्ष प्रेम बज महामंत्री सुरेश कासलीवाल नरेंद्र बज महावीर प्रसाद जैन विजय बज सहित अन्य सदस्यों द्वारा किया गया ।

 

 

 

आज युवा पीढ़ी धर्म से दूर हो रही है–माताजी
इसके पहले आर्यिका श्री सुस्वर मति माताजी ने कहा कि जो अपना जीवन गुरु के चरणों में समर्पित कर देता है वह जीवन की ऊंचाइयों को स्पर्श करते चले जाते हैं कल बहुत सारे युवा बड़े हर्ष उल्लास से बड़े बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी का महाभिषेक कर आनंदित हो रहें थे गुरु चरणों में दौड़ रहें थे आज युवा पीढ़ी धर्म से दूर हो रही है फिर भी जब संत समागम अतिशय कारी प्रभु का सान्निध्य पाकर अपने जीवन को धन्य बनाया।


जीवन भी कर्मो की किस्तों से चल रहा है
इसके पहले आचार्य श्री ने कहा कि पांच इन्द्रीय में एक भी कम हो तो लेनें के देने पड़ जाते हैं इन्द्रीय सारी महत्वपूर्ण है आप लोन लेते हैं तो किस्त जमा करने को अंग्रेजी आई कहते हैं यह भी आई और एम आई से जी रहे हैं आध्यात्मिकता की दृष्टि से कहे तो आपके लोन की तरह ये सांसे भी किस्तों पर ही है जब तक कर्म रूपी किस्त चल रही हैं तब तक ही जिंदगी सलामत है इसे संभाल ले।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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