ये संसार युग मृग मरीचिका का रेगिस्तान है आर्यिका मृदुमति माताजी
दमोह
आर्यिका 105मृदुमति माताजी ने शासकीय जेपीबी स्कूल में पहुंचकर वहां की छात्राओं को संबोधित किया माताजी ने अपने संबोधन में कहा कि छात्राओं को अपनी मनमर्जी को छोड़ माता पिता के मनमर्जी की इच्छा से शादी करके भारतीय संस्कृति की रक्षा कर सकती हैं।
उन्होंने सीख देते हुए कहा कि मत फिसलो ऊपर की सफाई पर वर्क सोने का चढ़ा है गोबर की मिठाई पर। आगे कहा कि यह संसार मृग मरीचिका का रेगिस्तान है। उन्होंने छात्राओं को लव जिहाद से बचने की बात कहते हुए कहा कि मत फिसलो। मोबाइल फोन का प्रयोग केवल पढ़ाई करके उसका सदुपयोग करें। साधु वृक्ष की तरह प्रतिकूलताओ को समभाव से सहते है। फिर भी दूसरो को संतोष रूपी फल देते है। पूज्य माता जी ने मेरी भावना का वाचन किया कहा कि घर-घर चर्चा होती रहे धर्म की व फैले प्रेम परस्पर जग में मोह दूर ही रहा करें, अप्रिय कटुक कठोर शब्द नहीं कोई मुख से कहां करें। उन्होंने कहा कि साधु जीवन कठिन नहीं है। हमारी आस्था में कठिनाई है।
माताजी ने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में केवल भेष कि नहीं बल्कि गुणों की पूजा प्रधानता से हुआ करती है। माताजी ने कई चारित्रवान सतियो के उदाहरण देकर नारी की पवित्रता का संदेश दिया।
वही स्कूल की छात्राओं ने माता जी के उद्बोधन से प्रभावित होकर अपनी इच्छा से हाथ उठाकर समस्त मादक पदार्थों का, नशीले पदार्थों का, मांस आदि अभक्ष्य पदार्थों को ग्रहण ना करने का संकल्प लिया।
आपको बता दें विद्या मृदु प्रवाह ग्रंथ प्रकाशन समिति द्वारा प्रवचन प्रभावना श्रंखला का तृतीय चरण संपन्न हुआ।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
