जन्माभिषेक शोभायात्रा में उमड़े श्रद्धालु -सुमेरु पर्वत पर 1008कलशों से हुए तीर्थकर बालक के जन्माभिषेक

धर्म

जन्माभिषेक शोभायात्रा में उमड़े श्रद्धालु -सुमेरु पर्वत पर 1008कलशों से हुए तीर्थकर बालक के जन्माभिषेक
श्री महावीरजी –

– 21 वीं सदी के भगवान महावीर के प्रथम महामस्तकाभिषेक महोत्सव की बेला में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में शुक्रवार की बेला मेंजन्म कल्याणक महोत्सव हुआ।
वही जन्माभिषेक की बेला में भव्य शोभा यात्रा निकाली गई व सुमेरु पर्वत पर तीर्थंकर बालक के 1008कलशों से इन्द्रों द्वारा जन्माभिषेक हुए।
प्रातः बेला मुख्य पाण्डाल से भव्य जन्माभिषेक शोभा यात्रा जुलूस निकला। जिसमें सबसे आगे घोड़े पर पचरंगा ध्वज लिए बालक, जिनवाणी का ऐरावत हाथी, धर्म चक्र, जयपुर से आया भगवान महावीर का 2550 वा निर्वाणोत्सव का रथ सहित 5
बैण्ड ,9बग्घियां,11हाथी जिनपर इन्द्र -इन्द्राणी विराजमान थे, ऊंट, घोड़े,ऊटगाडियां, एवं सैकड़ों श्रद्धालु शामिल थे । शोभा यात्रा मुख्य बाजार से होती हुई प्राकृतिक चिकित्सालय होते हुए मुख्य पाण्डाल स्थित सुमेरु पर्वत पहुंची जहां मंत्रोच्चार के साथ तीर्थंकर बालक के 1008 कलशों से जन्माभिषेक किए गए।
इससे पूर्व प्रातः रानी त्रिशला के महल में तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ।

 

 

सौधर्म इन्द्र-इन्द्राणि द्वारा धूमधाम से जन्मोत्सव मनाया गया। शचि इन्द्राक्षी द्वारा तीर्थंकर बालक के स्थान पर मायावी बालक को माता त्रिशला के पास सुलाकर जन्में तीर्थंकर बालक को सौधर्म इन्द्र के साथ जन्माभिषेक हेतु विशाल जुलूस के रुप में सुमेरु पर्वत ले जाया गया।


इस मौके पर आयोजित धर्म सभा में आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने
प्रवचन देते हुए शास्त्रों में उल्लेखित तीर्थकर बालक के जन्मोत्सव को विस्तार से बताया।

दोपहर 2.30 बजे से इन्द्र-इन्द्राणियों द्वारा संगीतमय जन्म कल्याणक पूजा की गई। पूजा के बाद हवन किया गया। सायंकाल इन्द्र-इन्द्राणियों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा संगीत पर झूमते, नाचते गाते श्री जी की महाआरती की गई।
तत्पश्चात आयोजित शास्त्र सभा में पं.हसमुंख जैन धरियावद वालों द्वारा धर्म की बातें बताई गई।
रात्रि में तीर्थंकर बालक के पालना महोत्सव में इन्द्र -इन्द्राणियों एवं श्रद्धालुओं द्वारा तीर्थंकर बालक को झुलाया गया।
प्रचार संयोजक विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि रात्रि में वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर महाराज के जीवन पर आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई। जिसमें आचार्य श्री के जन्म से लेकर अब तक की सारी जानकारियां मनोरम दृश्यों के माध्यम से बहुत ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत की गई।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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