अहिंसा से ही मानव कल्याण प्रदेश व देश का विकास हो सकता है अशोक गहलोत
श्री महावीरजी
श्री महावीरजी में ध्वजारोहण के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आगाज हो गया। जिसका विधिवत शुभारभ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया इसी क्रम में 25 नवम्बर को मनाया जाएगा। जन्म कल्याणक महोत्सव – शोभायात्रा व -सुमेरु पर्वत पर 1008कलशों से होंगे तीर्थकर बालक का होगा जन्माभिषेक
21 वीं सदी का भगवान महावीर का प्रथम महामस्तकाभिषेक महोत्सव के अन्तर्गत भव्य पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव गुरुवार, 24 नवम्बर को दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीरजी में शुरू हो गया। वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में आयोजित इस महामहोत्सव में राजस्थान के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत ने ध्वजारोहण कर इसका विधिवत शुभारंभ किया।
शुभारभ से पूर्व विशाल घटयात्रा जुलूस निकाला गया। घट यात्रा मुख्य पाण्डाल पहुंचकर संपन्न हुई।
इस अवसर पर गहलोत हैलीपेड से सीधे मुख्य मंदिर आए।और भगवान महावीर के दर्शन कर प्रदेश में खुशहाली और सुख, समृद्धि की मंगल कामना की। कमेटी द्वारा उनका स्वागत किया गया।। गहलोत सीधे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर उन जयकारों के बीच महोत्सव का ध्वजारोहण कर महोत्सव का आगाज किया।
धर्म सभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश दुनिया को भगवान महावीर के सत्य,अहिंसा अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य आदि सिद्धांतों की आवश्यकता है। महात्मा गांधी ने भगवान महावीर के सिद्धांतों एवं विचारों से प्रभावित होकर देश को आजाद करा दिया था।शांति,सद्भावना, अहिंसा से मानव कल्याण के साथ देश प्रदेश का विकास होगा।जहा सत्य अहिंसा है वहा ईश्वर का निवास होता है।
मै प्राइमरी तक जैन स्कूल में पढ़ा हूं
गहलोत ने अपनी प्राइमरी शिक्षा को याद करते हुए कहा कि मैं प्राइमरी तक जैन स्कूल में पढ़ा हु। जो संस्कार आज भी मुझे याद है। उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि भारत की जो प्राचीन संस्कृति है उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता है।
भारत की प्राचीन संस्कृति का मुकाबला कोई नहीं कर सकता है।
आचार्य वर्धमान सागर महाराज के आशीर्वचन को अपने जीवन में आत्मसात करके हमारा जीवन सही मायने में धन्य हो सकता है।
मुख्यमंत्री गहलोत ने आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज पर बोलते हुए कहा कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज के आशीर्वचनों को अपने जीवन में आत्मसात करने पर हमारा जीवन सही मायने में धन्य होता है। उन्होंने कहा कि आज मेरा यहां आना सही मायने में सार्थक हो गया है। उन्होंने महोत्सव के ध्वजारोहण करने को अपना सौभाग्य बताया। और कहा कि यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी सौगात है।
ध्यान केंद्र की मूर्तियों को देखने के बारे में कहते हुए कहा कि कि मैं ध्यान केंद्र की मूर्तियों को देखकर सचमुच अभिभूत हो गया हु। शायद देश में ऐसा संग्रहालय कही नहीं होगा।

विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक धार्मिक कार्यक्रम है इसीलिए में धर्म तक सीमित रहना चाहता हूं। आगे बोलते हुए कहा कि मानव मानव की सेवा करें, और जातियों में ना बटे, यही प्राणी मात्र का कल्याण होगा। महावीर जी के बारे में बताया गया कि महावीर जयंती पर वाल्मीकि,मीणा,गूर्जर सभी जातियों के लोग बिना किसी भेदभाव के जुलूस में सहभागिता निभाकर सामाजिक सोहार्द की मिशाल कायम करते हैं जो यहा की विशेषता है।नई पीढ़ी तक यह संदेश पहुचना चाहिए।राज्य सरकार ने अहिंसा शांति विभाग इसीलिए बनाया है ताकि भगवान महावीर, भगवान बुद्ध सहित सभी महापुरुषों के संदेश नई पीढ़ी तक पहुंचे।
आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि धार्मिक अनुष्ठान एवं धार्मिक क्षेत्र में प्रदेश की सरकार का सहयोग धर्म कार्य है। धर्म से मंगल और सुख शांति प्राप्त होती है। भगवान महावीर सहित चौबीस तीर्थंकरों ने धर्म की ज्योति जलाई है अतः सभी जीवों को धर्म धारण करना चाहिए।पांच महाव्रत सबका कल्याण करने वाले हैं।आत्मिक सुख धर्म से ही प्राप्त होता है। आत्मिक सुख प्राप्त करने के लिए भौतिक सुखों का त्याग करना पड़ता है।यह महोत्सव सबका मंगल करेगा मैं ऐसी भावना भाता हूं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी इस क्षेत्र को अहिंसा क्षेत्र घोषित करे जिससे देश में सुख शांति हो।इस मौके पर पीडब्ल्यूडी मंत्री भजन लाल जाटव, पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह,पंचायती राज मंत्री रमेश मीना, सवाईमाधोपुर विधायक दानीश अबरार,हिण्डौन विधायक भरोसे लाल जाटव, करौली विधायक लाखन सिंह, दिनेश खोडनिया सहित कई राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी मंच पर उपस्थित थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
