परमार्थ के कार्य करते हुए “पारसमल धर्मचंद बिलासपुरिया चैरिटेबल आयुर्वेदिक औषधालय ने किया एक वर्ष पूर्ण
टोंक
कहा जाता है
नियत साफ हो जिनकी,उनके कदमों में जमीं होती है……
आसमां में उड़ने वालों को,कब सितारों की कमी होती है।
ऐसा ही परमार्थिक कार्य पारसमल धर्मचंद बिलासपुरिया चैरिटेबल आयुर्वेदिक औषधालय ने किया।

विवरण
परम पूज्य मुनि पुंगव 108 श्री सुधा सागर जी महाराज के आशीर्वाद एवम प्रेरणा से संचालित *”पारसमल धर्मचंद बिलासपुरिया चैरिटेबल आयुर्वेदिक औषधालय ने कुशलता पूर्वक प्रथम वर्ष को पूर्ण किया।
दिनांक 15 जनवरी 2021 को जनसाधारण की सुविधा हेतु श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन तेरापंथ ट्रस्ट भवन पुरानी टोंक में औषधालय प्रारंभ किया गया। इस औषधालय का प्रथम वर्ष सुचारू रूप से कार्यरत होने में समाज के सभी लोगों का तथा श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन तेरापंथ ट्रस्ट टोंक का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।
पारसमल जैन बिलासपुरिया बडजात्या परमार्थिक चेरिटेबल ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 G के अंतर्गत पंजीकरण। दिनांक 02.10.2021 को हुआ। द्वारा अनेक लोग औषधि के माध्यम से रोग से मुक्त हुए। गत वर्ष अनेक साधु सन्तो का
औषधालय को आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
औषधालय को गणिनी आर्यिका 105 विशुद्ध मति माताजी ससंघ टोंक प्रवास के दौरान औषधालय को लाभ व आशीर्वाद प्राप्त हुआ। जो इसकी सफलता की कहानी कहता है। स्म्रति पर एक वर्ष पर यदि ध्यान इंगित किया जाए तो ज्ञात हुआ,औषधालय परिसर में दि.13.12.2021 को गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ का आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए समाज को मंगल आशीर्वाद प्राप्त मिला।
जानकारी देते हुए संगीता बिलासपुरिया पुरानी टोंक ने बताया दिनांक 14 जनवरी 2022 तक कुल 2260 लाभार्थियों ने औषधालय में निशुल्क चिकित्सा एवं औषधियाँ प्राप्त की।
जैनागमानुसार के अनुसार चार प्रकार के दान का प्रमुखता से वर्णन है। उसी में औषधि दान को महादान कहा गया है। क्योंकि औषधि ही एक ऐसा संयोग है जिससे हम अपनी बीमारियों को ठीक कर सकते हैं।

साथ ही अगर
हम संतों को औषधि दान करते हैं तो उच्च गौत्र की प्राप्ति होती है। सचमुच ऐसे अनुकरणीय कार्य समाज को एक दिशा देते है। मेरी और से भी यही कामना व भाता हु की यह औषधालय का यह सिलसिला अनवरत यूं ही चलता रहे, बढ़ता रहे,फूले फले।
अनन्त अनुमोदना।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
