सिद्ध चक्र मण्डल विधान विश्व शांति महायज्ञ के साथ सम्पन्न

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सिद्ध चक्र मण्डल विधान विश्व शांति महायज्ञ के साथ सम्पन्न

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अग्रवाल जैन मंदिर में आयोजित नवदिवसीय सिद्ध चक्र मण्डल विधान अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन किया गया। जिसमें समाज के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला व सुनील भाणजा ने बताया कि समापन के अवसर पर विश्व शांति महायज्ञ किया गया जिसमें पूजार्थियो ने हवन कुंडो मे आहुतियां दी। विधानाचार्य जिनेश भैया के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ के अभिषेक क्रिया करवाकर शांतिधारा की। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया।

 

 

 

 

जौंला ने बताया कि नवदिवसीय मण्डल विधान को सफल करवाने के उपलक्ष्य में विधानाचार्य जिनेश भैया का जैन समाज ने सम्मानित किया। इस दौरान वर्षायोग मंगल कलशों का वितरण किया गया जिसमें सोभाग्यशाली परिवारों के यहाँ गाजेबाजे के साथ मंगल कलश विधिवत मंत्रोच्चार द्वारा स्थापित किया गया जहाँ भगवान का गुणगान करके श्रद्धालुओं को भात बांटी गई। इस दौरान जैन समाज के मंत्री महावीर प्रसाद जैन पराणा सत्यनारायण जैन मोठूका विष्णु बोहरा सुनील भाणजा पारसमल प्रेस बडांगाव ज्ञानचंद सोगानी विमल पाटनी राकेश संधी संजय सोगानी सुरेश भाणजा विमल सोगानी सहित कई लोग मौजूद थे।

यदि गुरु के बताये मार्ग पर चल पड़े तो अपने ही भीतर मौजूद अनन्त शक्तियां जागृत हो जाएगी विज्ञाश्री

इस अवसर पर भारत गौरव आर्यिका विज्ञा श्री माताजी ने धर्म सभा में कहा कि आज का दिन बड़ा महत्वशाली है। गुरु के प्रति समर्पण निष्ठा आस्था श्रद्धा का यह दिवस प्रेरणा देता है कि यदि गुरु के बताये मार्ग पर चल पड़े तो अपने ही भीतर मौजूद अनन्त शक्तियां जागृत हो जाएगी।उन्होंने कहा कि परमात्मा को कहीं भी ढूंढने की जरूरत नहीं है बल्कि पहले परमात्मा को पाने के लिए अपने भीतर की यात्रा शुरू करो।भगवान केवल कल्याण के प्रतिबिम्ब है जबकि गुरु उपकारी होता है।भगवान किसी को कुछ न देते है और न लेते हैं लेकिन गुरु अपने शिष्य को भगवान की राह बताता है उनसे मिलने की कला सिखाता है ओर भगवान की तरह मोक्ष पर जाने की सही मंजिल बताने में आज भी सक्षम है।

गुरु की महिमा का कोई अंत नहीं है तभी तो भगवान से पहले गुरु को महान बताया गया है।

 

जैन समाज के मंत्री महावीर प्रसाद पराणा एवं विष्णु बोहरा ने बताया कि विधान मे भगवान शांतिनाथ के शांतिधारा के साथ कलशाभिषेक किया गया। तत्पश्चात आचार्य विराग सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप-प्रज्वलित एवं चित्र अनावरण हुआ। इसके बाद आचार्य विराग सागर जी महाराज व गुरु मां विज्ञा श्री माताजी की भक्ति संगीत के साथ सामूहिक पूजा की गईं। जिसमे समाज के महिला मण्डल सहित सभी श्रद्धालुओ ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। इस अवसर पर गणाचार्य विराग सागर महाराज एवं आर्यिका विज्ञा श्री माताजी की पूजा अर्चना की गई।

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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