आचार्य भगवंत के दर्शनार्थ पहुंची पूर्व मुख्यमंत्री श्री वसुंधरा राजे –
जयपुर
गौरवशाली राजस्थान की राजधानी जयपुर* में वर्षायोगरत पांच भाषाओं के ज्ञाता,अहिंसा शांति की प्रतिमूर्ति व विशाल संत संघ के नायक चतुर्थ पट्टाचार्य आचार्य सुनील सागर गुरूराज* के पावन वन्दनार्थ पूर्व मुख्यमंत्री श्री वसुंधरा राजे पधारी,जिनके साथ भाजपा राजस्थान के नेता श्री अशोक परनामी भी सम्मिलित हुए।
राजे ने एक सामान्य श्रावक की तरह गुरूदेव से आध्यात्मिक चर्चा की
माननीय वसुंधरा राजे की आध्यात्मिक रुचि देखने को मिली। जब राजे ने एक सामान्य श्रावक की तरह बैठकर पूज्य गुरुदेव को श्रद्धा विनय से नमन वंदन करते हुए आधे घंटे तक आध्यात्मिक विषय पर विस्तृत चर्चा की।

पूज्य गुरुदेव का उपवास व मौन था फिर भी वात्सल्य धारी गुरुदेव संकेत पूर्वक, लिखकर व साहित्य के माध्यम से आध्यात्मिक चर्चा का लाभ प्रदान कर रहे थे।
जिसमे माननीय वसुंधरा एक अलग सी लिपि में रचित पुस्तिका को देखकर अत्यंत आश्चर्य चकित हुई।
जिस पर पूज्य गुरुदेव ने बताया की यह विश्व की सबसे प्राचीन लिपि है।
जिसे प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने सन्यास से पूर्व अपने राज्य शासन काल में सर्व प्रथम अपनी पुत्री ब्राह्मी को गोद में बैठाकर सिखाई जिससे इस लिपि का नाम ब्राह्मी है उस समय दो महान शुभ संदेश व कार्य प्रारंभ हुए एक तो बेटी पढ़ाओ का संदेश तो दूसरा किसी भी भाषा बोली का प्रथम बार लिपि बद्ध होना। इसी ब्राह्मी लिपि से अनेक लिपियों का निर्माण हुआ जिससे आज हम अनेक भाषाओं को लेखन के रूप में देखते है। भगवान आदिनाथ ने राज्य शासन के दौरान देश की जनता के जीविकोत्पार्जन व विकास हेतु सर्वप्रथम असी,मसी ,कृषि,वाणिज्य व शिल्प सहित 64 कलाओं का शिक्षण पूर्वक उपदेश दिया था उसे ही आज कौशल विकास कहा जाता है और यही आज देश की तरक्की में सबसे महत्वपूर्ण है ।
पूज्य गुरुदेव से भारत की अत्यंत प्राचीन आध्यात्मिक संस्कृति व ज्ञान विरासत को जानकर श्री वसुंधरा अत्यंत गर्वित हुई।साथ ही आचार्य श्री ने उनको शुभाशीष प्रदान कर जन जन प्रत्येक जीव (मनुष्य से लेकर पशु पक्षी पेड़ पौधों) का कल्याण करते हुए राष्ट्र सेवा का मंगल आशीष दिया।
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शाह मधोक जैन चितरी से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
