हमें भी निरंजन होना होगा, तभी मोक्ष मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होगी। प्रज्ञासागर जी
उज्जैन
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के आठवे दिन: 1024 अर्घ्य समर्पित किए, बुधवार को शांतिधारा के बाद शोभायात्रा निकाली जाएगी अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजा व हवन पूर्णाहुति होगी व वात्सल्य भोज होगा।
मंगलवार को लक्ष्मीनगर में अपने उदबोधन में तपोभूमि प्रणेता प्रज्ञासागर महाराज ने कहा की मन का में खत्म करने का एकमात्ररास्ता तप है, धर्म है। जैन धर्मतपस्या, त्याग का धर्म है। वह उत्सव भी तपस्या और त्याग के माध्यम से मनाता है।
उन्होंने कहा भगवान निरंजन हो चुके हैं तो हमेंभी निरंजन होना होगा, तभी मोक्षमार्ग की प्राप्ति होगी। हमें यही भावना रखना है कि भगवान की भक्ति भाव पूर्वक करें, ताकि आपका मन निरंजन हो जाए और अंजन से मुक्त हो जाए।
समाज सचिव डॉ. सचिनकासलीवाल ने बताया कि आचार्यश्रीको महापौर मुकेश टटवाल, निगमअध्यक्ष कलावती यादव, विधायकपारस जैन, मंत्री मोहन यादव और प्रतिपक्ष नेता पार्षद रवि राय नेआग्रह किया कि आप 11 नवंबर कोदोपहर 4 निगम परिसर में पहुंचकरआशीर्वचन दें। महाराज ने निगम मेंधार्मिक सभा की स्वीकृति प्रदान की।,
अतिथि का सम्मान किया। इस अवसर पर उपाध्याय का मंदिर ट्रस्ट कमेटी एवं विधान समिति ने विभाष उपाध्याय का सम्मान किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
