आचार्य श्री वर्धमान साग़र जी महाराज सानिध्य में जैन समाज का एक भी परिवारन होने पर और अधिकांशतः मुस्लिम समाज होने पर भी हजारों श्रावक श्राविकाओं के साथ श्री जी की शोभा यात्रा निकाली एक संस्मरण

धर्म

आचार्य श्री वर्धमान साग़र जी महाराज सानिध्य में जैन समाज का एक भी परिवारन होने पर और अधिकांशतः मुस्लिम समाज होने पर भी हजारों श्रावक श्राविकाओं के साथ श्री जी की शोभा यात्रा निकाली एक संस्मरण
संस्मरण
परम पूज्य आध्यात्मिक सन्तशिरोमणि आचार्य श्री 108वर्धमान सागर जी महाराजवर्ष 1993 में पंचम पट्टाधिश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज मुनि दीक्षा के 24 वर्ष बाद 24 वे तीर्थंकरश्री महावीर के प्रतिरूप सनावद, खंडवा, पंधाना होतेहुए महावीर जयंती के दिन असीरगढ़ बुरहानपुरपहुँचे। इस नगर में एक भी जैन परिवार नही हैआचार्य श्री का आहार एवम महावीर जयंती होने के

 

 

 

कारण सनावद, बड़वाह, बेड़िया, खंडवा, पंधाना,बुरहानपुर, शाहपुर आदि नगरों के हजारों समाज
जन असीरगढ़ पहुँच गए यह इतिहास का पहलाअवसर था की जब जैन समाज का एक भी परिवार न होने पर और अधिकांशतः मुस्लिम समाज होनेपर भी हजारों श्रावक श्राविकाओं के साथ श्री जीकी शोभा यात्रा निकाली गई।सच है की निमाड़ के लाड़ले संत के जादुई आकर्षण से हर कोई स्वतः हीखीचा चला गया, धन्य है ऐसे गुरुदेव
अजय पंचोलिया सनावद
वात्सलय भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

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