महावीर ने संपूर्ण वातावरण को अहिंसामय बनाया मुनि श्री समता सागर जी महाराज
दमोह जब चारों ओर हिंसा का वातावरण था, निर्दोष पशुओं को धर्म के नाम पर जलाया जाता था, कर्मकांड का जोर था, महावीर ने आगे बढ़कर बहुत बड़ी क्रांति की अपने पुरुषार्थ से संपूर्ण वातावरण को अहिंसामय बनाया। महलों में बड़े पले सुकुमार महावीर जब योवन की दहलीज पर पहुंचे तो उन्होंने वैराग्य का अंगीकार कर लिया।क्योंकि उन्हें जन्म जरा और मृत्यु का निदान महलों में दिखाई नहीं दिया। इन महा दुखों का निवारण धर्म की शरण में ही है। ऐसा जानकर उन्होंने मुनि धर्म को अंगीकार कर लिया।और सारे संसार के महा मोह रूपी रोग के निवारण हेतु धर्म का उपदेश दिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
