कन्यादान का फर्ज बेटी ने मुखाग्नि
देकर किया
सनावद
नगर के दिगंबर जैन किराना व्यापारी 67 वर्षीय श्री उदय चंद पहाड़िया के आकस्मिक निधन हुआ लेकिन पुत्र परिवेश के विदेश में था उसकी इसकी सूचना उन तक पहुँची भी, लेकिन वह विदेश में होने से आ नही पाए।
समाज के लिए बनी मिसाल
उसके बाद जो कुछ हुआ वह एक सन्देश दे गया। हमें श्री राजेश पचोलिया ने बताया की पुत्र के न होने से समाज की अनूठी पहल व पुत्री विनीता के कदम ने सभी को एक सीख दी औऱ प्रेरणा बनकर आई पुत्री विनीता ने एक पुत्र बनकर समस्त अंतिम क्रिया को सम्पन्न किया। इन पलो को देख भला कोन अपने अश्रु को रोक पाएगा।
बेटा बेटी एक समान
आज समाज को यह उदाहरण सार्थक हुआ की बेटा और बेटी एक समान है, उसमें फर्क न समझा जाए। इन विड़बना को बदलना होगा किसी ने क्या खूब कहा घर मे बटाके हाथ रहती है माँ के साथ पिता की समस्त बाधा हरती है बेटियों, औऱ कितने उदाहरण ढूंढकर लाऊ, अर्थी को काँधा देकर, अब शमशान तक जाने लगी बेटियां।
आज यह प्रमाणित होता है, बेटी पराया धन नही अपना धन होती है। इस सोच को बदलना होगा। अकसर देखने मे आता है यदि माता,पिता, या भाई पर संकट आता है तो बेटियां उसे अपना संकट मानकर उससे उबार देती है। यह घटना समाज के लिए एक प्रेरणा औऱ एक नवज्योति लेकर आई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
