*अंहकार के अधंकार का शमन है दीपावली*
अमावस्या की घोर अंधियारी रात को दीपकों की रोशनी से जगमगाने का प्रयास करने का पावन पर्व है दीपावली! “अहंकार के अंधकार का शमन है दीपावली” वैसे तो इस पर्व का महत्व बड़ा ही अलौकिक एवं धार्मिक है क्योंकि यह वह पावन दिन है जिस दिन जैन धर्म के वर्तमान शासन नायक व अंतिम 24वें तीर्थंकर ने सर्वोच्च पद निर्वाण को प्राप्त किया। सरल भाषा में कहें तो भगवान महावीर ने इस अमावस्या की रात को स्वयं द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों से स्व आत्मा व विश्व को प्रकाशित किया। इस महापर्व को *सिद्धांतों का प्रकाश पर्व* भी कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
वर्तमान परिस्थितियों में यदि अपने चारों ओर नजरें दौड़ाए तो भगवान महावीर के सिद्धांत बड़े ही प्रासंगिक दृष्टिगोचर नजर आते हैं। संपूर्ण विश्व आतंक- युद्ध की विभीषिका से विचलित नजर आ रहा है तो ऐसे में अहिंसा के सिद्धांत को अपनाकर शांति और विकास का मार्ग कायम किया जा सकता है। 2549 वर्ष व्यतीत

होने के बाद भी जिन के सिद्धांतों का महत्व और अधिक बढ़ता जा रहा है तो ऐसे देदीप्यमान, प्रकाशमान सिद्धांतों को जैन अनुयायियों के द्वारा ही नहीं वरन संपूर्ण विश्व के द्वारा अपनाना चाहिए। तभी हाहाकार कर रही अमावस्या की यह रात प्रकाशित हो सकती है। आइए मन के अंधेरे को दूर करने के लिए एक छोटा सा दीप जलाते हैं और एक दूसरे से वैमनस्यता एवं मतभेदों को समाप्त कर नई रोशनी की ओर कदम बढ़ाते हैं।

*आत्म तत्व प्रकाशित हो पुलकित हो विश्व सारा*
*अहिंसा का दीप जगमग हो मिटे अंधकार हमारा*
भगवान महावीर के निर्वाणोत्सव की आप सभी को शुभकामनाएं/बधाई
*संजय जैन बड़जात्या कामां* राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री जैन पत्रकार महासंघ
