शीर्षक- *महावीर प्रभु की याद दिलाने…*
राजा सिद्धार्थ के घर जन्मे, माता जिनकी त्रिशला रानी।
महावीर प्रभु की याद दिलाने,आई दीवाली रात सुहानी ।।
सज रहे है महल अटारी ग्राम,नगर और कुण्डलपुर नगरी।
चौबीस दीपों के थाल सजाकर, मंगल स्वागत की तैयारी।
जैनम् जयति शासनम् की ,जय -जयकार करते नर-नारी।
महावीर प्रभु की याद दिलाने________________

जैनियों के घर अलख जगाती, बनकर के दीपों की रानी।
जगमग करती दीप ज्योति, नव प्रकाश नव आशा भरती।
अहिंसा का जिसने पाठ पढ़ाया,धन्य हुआ जग का प्राणी।
महावीर प्रभु की याद दिलाने________________
तीर्थंकर महावीर का संदेश यही है, अहिंसा परमो धर्म है।
मनुष्य जन्म से नहीं बनता है महान, महान बनाता कर्म है।
‘जियो और जीने दो’ की दिव्य वाणी, मत भूलो रे प्राणी ।
महावीर प्रभु की याद दिलाने________________
स्वाति नक्षत्र में कार्तिक अमावस्या, शुभ दिन हुआ चर्चित।
महावीर स्वामी का हुआ निर्वाण, जन-जन सुमंगल हर्षित।
इस शुभ दिन केवल ज्ञानी बनें, प्रथम गणधर गौतमस्वामी।
महावीर प्रभु की याद दिलाने________________

‘रिखब’ श्रद्धा भाव से दीप जलाकर,कुण्डल,पावापुरी नगरी।
‘कल्पेश’ निर्वाण मोदक कर रहा है,वीर के चरणों में अर्पित।
देव,शास्त्र,गुरु के चरणों में निशदिन, जीवन हमारा समर्पित।
महावीर प्रभु की याद दिलाने________________
राजा सिद्धार्थ के घर जन्मे, माता जिनकी त्रिशला रानी।
महावीर प्रभु की याद दिलाने,आई दीवाली रात सुहानी ।।
- रचयिता
रिखब चन्द राँका ‘कल्पेश’
(शिक्षक, साहित्यकार)
स्वरचित एवं सर्वाधिकार सुरक्षित
जयपुर। राजस्थान
