*जिला प्रमुख को वाहन उपलब्ध कराने में हो रही घृणित राजनीति* ।
कोटा
कोटा जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल अपने ऑफिस बाइक से आ जा रहे हैं। उन्हें जो कार आवंटित की गई है वो खटारा है । कुछ दिन पहले उस कार के ब्रेक फेल हो गए थे जिस कारण एक्सीडेंट होते होते बचा तो जिला प्रमुख ने उसमें बैठना बंद कर दिया। दूसरी कार के लिए कहा तो ड्राइवर ही लेने नहीं गया। इसके बाद वे बाइक से ऑफिस आ जा रहे हैं। इस प्रकरण में जिला प्रमुख के पक्ष में भाजपा जिला अध्यक्ष व जिला महामंत्री नरेन्द्र राजा भाजपा के मण्डल अध्यक्षों व कार्यकर्ताओं के साथ जिला परिषद कार्यालय पहुचे उन्होंने सीईओ ममता तिवारी व कॉंग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर चेताया कि यदि 10 दिन के अंदर जिला प्रमुख को सुरक्षित वाहन उपलब्ध नहीं करवाया तो भाजपा आंदोलन करेगी ।
दरअसल जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल को जिला परिषद की तरफ से सफारी गाड़ी दी गई। गाड़ी खराब हालत में थी, उसे काम चलाऊ तैयार कर जिला प्रमुख को दे दी गई। मुकेश मेघवाल ने बताया कि उनकी कार के कभी गेट जाम हो जाते तो कभी कांच जाम हो जाते। 25 दिसंबर को उन्हें सरकारी गाड़ी मिली लेकिन वह भी सरकारी ढर्रे पर ही चलती रही। दो बार सड़क पर धोखा दे गई। कुछ दिन पहले सांगोद में ब्रेक फ़ैल हो गए। जिसमें वे बाल बाल बचे। इसके बाद तो जिला प्रमुख मेघवाल ने इस कार से तौबा कर ली।

उन्होंने सीईओ से दूसरी गाड़ी के लिए कहा। उन्हें डिजायर गाड़ी के लिए कहा लेकिन ड्राइवर ही नहीं आया। इसके बाद उन्होंने अपनी बाइक से ही आना जाना शुरू कर दिया। उनकी खराब हो चुकी कार जिला प्रमुख चेंबर के बाहर ब्रेकडाउन हाल में खङी है।
60 किलोमीटर बाइक से तय करते है सफर

प्रोटोकॉल के हिसाब से तो जिला प्रमुख को सही और सुरक्षित गाड़ी देनी चाहिए थी लेकिन खटारा गाड़ी उन्हें दे दी। जिसके बाद अब वे अपनी बाइक से ही गांव से जिला परिषद् आते है। सांगोद में उनका गांव है वहां से करीब 60 किलोमीटर का सफर वे सर्द हवाओं के थपेड़ो के बीच तीन दिन से बाइक पर तय कर रहे है। मुकेश मेघवाल का कहना है कि मैं तो गांव का आदमी हूं, अगर सही गाड़ी नहीं देते तो मैं बाइक से आता जाता रहूँगा ओर जनता की सेवा करूँगा ।
