भगवान में अनन्त गुण होते है समता सागर जी महाराज

धर्म

भगवान में अनंत गुण होते हैं मुनि श्री समता सागर जी महाराज

दमोह
भगवान में अनंत गुण होते हैं भक्त भगवान की इसी उद्देश्य से भक्ति आराधना करता है की भगवान के गुण उसमें भी समाहित होते जाएं भगवान का गुण अनुवाद इसीलिए किया जाता है ताकि पंच परमेष्ठी हमारे निकट वास करें उनका मंगल सानिध्य हमें निरंतर मिलता रहे। क्योंकि इस कलीकाल पंचम काल में आत्म कल्याण के लिए यही मार्ग है।
उपरोक्त उद् गार वात्सल्य मूर्ति ओजस्वी वक्ता आज्ञानुवर्ती परम शिष्य मुनि श्री समता सागर जी महाराज ने अपने प्रातः कालीन प्रवचन ओं में दिगंबर जैन धर्मशाला में अभिव्यक्त किये। इस अवसर पर नन्हे मंदिर की महिला मंडल के द्वारा आचार्य श्री की सुसज्जित अष्ट द्रव्य से मंगल पूजन की गई। इस मौके पर दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर सिंघई,कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के मंत्री श्रेयांश लहरी,प्रचार मंत्री सुनील वेजीटेरियन, नन्हे मंदिर कमेटी के अध्यक्ष ग्रीस अहिंसा, महामंत्री चक्रेश सर्राफ ,नेमचंद बजाज राजेश हिनौती, राजेंद्र अटल,अनिल फोटो, अखिलेश पंडित जी, गुड्डू भैया, रिंकू सिंघई, पवन चश्मा आदि की उपस्थिति रही
मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन ओं में आगे कहा कि चंदनबाला की मुनि भक्ति सर्वोत्कृष्ट है। उसने विपरीत परिस्थितियों में भी पडगाहन करके भगवान को आहार देने का सौभाग्य पा लिया था। रानी की बहन होकर भी वह कारागृह में कष्ट भोग रही थी। राज महलों को छोड़कर उसने तहखाने में रहकर कष्टों को समता पूर्वक सहा। और जब संयोग बना तो उसने भगवान को आहार दिया। नगर में जय जय कार हो गई,वर्धमान का आहार राज महल में नहीं हुआ। रानी की छोटी बहन चंदनबाला ने भगवान को आहार देने का सौभाग्य पाया। जैन मुनि धन वैभव को देखकर नहीं,   वरन  भक्तो की भक्ति देखकर आहार ग्रहण करते है, ओर भक्तो के द्वार पहुँच जाते है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी

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