सम्मेद शिखर को देख द्रवित हुआ मन
संस्कार जैन सोहम, प्रशान्त जैन की कलम से
देखकर मन द्रवित है और ग्लानि भी होती है कि कैसे एक ऐसे धर्म जो की पूर्ण रूप से अहिंसा परमोधर्म के साथ विश्व को लेकर चल रहा है। जिसने मानव जाति के नैतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है आज उसके यह हाल है , हमारे 20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि हमारा गर्व शान स्वाभिमान शाश्वत सिद्ध क्षेत्र सम्मेद शिखर जी में आज मांस मदिरा की दुकान (जानबूझकर) , जैनेतर लोगो का वहा पर आना और राज्य सरकार द्वारा कुछ भी ना करना यह बताता है कि हम भले ही भारत का 25% जीडीपी सहयोग करते है। भारत की सबसे बड़ी टैक्स पेयर कम्युनिटी है परन्तु देश की राजनीति में कोई ऐसा प्रतिनिधित्व नहीं है। और अगर है भी तो इतनी निष्क्रियता । वाकई में कभी कभी लगता है कि क्या सच में हम इतने पुण्य शाली है और अगर हमारे पुण्य इतने तीव्र है तो फिर क्यों ऐसा हो रहा है , पर खैर समाज के कुछ ऐसे लोग जो अपने आपको समाज का प्रतिनिधि मानते है उनका तो नहीं पता लेकिन समाज के युवाओं ने ट्विटर पर बचाओ_पवित्र_तीर्थ_शिखरजी
नाम से इतना ट्रेंड चलाया है कि हम अभी चौथे स्थान पर ट्रेंड कर रहे है और आगे बढ़ेंगे भरोसा है ।
पर सवाल आप सब से है कि क्या गिरनार जी की तरह शिखर जी भी हाथ से जाएगा या अनादिकाल तक वह हमारा स्वाभिमान कहलाएगा ।
संस्कार जैन ‘ सोहम ‘ प्रशांत जैन
विचार करिएगा और हो सके तो अपने स्तर में हर तरीके से परन्तु जल्दी इसके लिए कुछ करिएगा
उत्तम क्षमा।
