हमारे सुंदर विचारों से,सुंदर आचारण से जीवन सुंदर बनता है विशल्य साग़र जी

धर्म

 

 

हमारे सुंदर विचारों से,सुंदर आचारण से जीवन सुंदर बनता है विशल्य साग़र जी

झुमरीतिलैया

 

 

 

-27 सितम्बर जैन मंदिर झुमरी तिलैया में विराजमान जैन संत श्रमण मुनि श्री 108 विशल्यसागर जी गुरुदेव ने धर्म सभा में अपने उद्बोधन में कहा कि – हमारे सुंदर विचारों से,सुंदर आचारण से जीवन सुंदर बनता है और यही सुंदर जीवन ही एक दिन परमात्मा के नजदीक ले जाता है

 

बूंद – बूंद से घड़ा भर जाता है ,एक एक मोती को जब धागा में पिरोते है तो वह भी माला बन जाती है ,एक – एक ईट लगाते लगाते ईमारत खड़ी हो जाती है आचार्य कहते है कि जीवन के अच्छे गुणों को एक सूत्र में पिरोये तो जीवन आगम बन जाता है जोड़ो मत छोड़ो,जोड़ो तो बेजोड़ जोड़ो।

जीवन एक किताब है उसमें देखो क्या – क्या लिखा है जो अच्छा है उसे प्रेंट करा लो जिसे हर कोई पढ़ना पसंद करें।जिंदगी की इतनी अच्छी किताब बनाओ कि कितने ही लोग उससे खिताब पा करके ,जीवन की किताब तैयार कर ले, हम अपने पूज्य पुरुषों ने अपने जीवन में सागर में गागर भरा,अपने जीवन में महान से महान कार्य किए ।हमारे तीर्थंकरों ने अपने जीवन में उस व्यकत्व को प्राप्त किया जिसे गणधरों ने पढ़ा और गणधरों की जीवन की किताब इतनी महान थी जिसे मुनिराजों ने किताब लिख ली और आज हम भी उनकी किताब से अपनी किताब ठीक करे।

 

सुनो ,गुनो ,चुनो और अपने जीवन में अच्छा – अच्छा बुनो। शरीर वियोग धर्म है,चेतन संयोग धर्म है जीवन शोक धर्म है लहराकर चलना यानि वक्र गति से चलना अब ऋजु गति से चलना है गन्ने की गांठ कोई रस नहीं देती लेकिन अगर उसको वो दो तो उसमें रस ही रस निकला है हम भी अपने जीवन को ऐसा बनाए, कार्यक्रम में विशेष रूप से संघस्थ अलका दीदी ,भारती दीदी, के साथ समाज के सेकड़ो लोग उपस्थित थे उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा,नवीन जैन ने दी

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