व्यक्ति जब तक अपनी इच्छाओ के पूर्ण होने की घोषणा नही करता तब तक उसकी समाधि पूर्ण नही हो सकती,,,सुधासागर महाराज
ललितपुर
श्री अभिनंदनोदय तीर्थ पर विराजमान निर्यापक मुनि सुधासागर जी महाराज ने कहा1 व्यक्ति जब तक अपनी इच्छाओ के पूर्ण होने की घोषणा नही करता तब तक उसकी समाधि पूर्ण नही हो सकती,,,
उन्होंने कहा आचार्यो ने शास्त्रो में बार बार कहा हैं कि पूर्णता की प्राप्ति के लिये त्याग का रास्ता सर्वोपरि हैं। इसलिए प्रत्येक कार्य के पूर्व उसे सीमित करते जाइये। जैसे कि निश्चित कर लिया जाए कि आज हम इतना ही खाएंगे इससे अधिक नही। और जब यह साधना पूर्ण हो जाये तो मन मे तृप्ति के भाव आने लगते हैं। अतः जीवन मे त्याग की ओर बड़ो,।,, अतः भगवान महावीर कहते हैं जो जो छूटना हैं उसे मरने के पहिले ही छोड़ दो वही समाधि हैं।
आगे बोलते मुनि श्री ने कहा कोर्ट में भी फांसी के समय मरने के पूर्व यह पूंछा जाता हैं कि आपकी अंतिम इच्छा क्या है?और उसे पूरा किया जाता हैं। एक कथा के अनुसार साधक के मरने से पहले उसके गुरु ने कहा इसे लाकर दो और आने के बाद निर्यापकाचार्य कहते है क्षपक आज जो आपने मांग लिया उसकी पूर्ति तो हमने कर दी। लेकिन इसके बदले में इसकी कीमत आपकी जिंदगी का पूरा पुण्य होगा। तब क्षपक अपने ज्ञान से जानता हुआ उस वस्तु का भी त्याग कर देता हैं तब उसकी समाधि सफल होती हैं।
पूज्य मुनि श्री ने तरबुज का उदाहारण दिया कहा एक आदमी मरने के पूर्व तरबूज खाने के भाव करता हैं तरबूज आने के पूर्व ही वह मर गया। जब अवधिज्ञानी मुनिराज कहते हैं कि वह तरबूज का कीड़ा बना है जब परिजनों ने जाकर देखा तो पाया कि वाकई में वह तरबूज में कीड़ा बना बैठा था,,, तब गुरुदेव कहते हैं कि जब व्यक्ति इस बात की घोषणा करने में सक्षम हो जाये कि अब मेरी कोई भी इच्छा नही रही तभी उसकी मृत्यु सफल होगी समाधि मरण होगा।
प्रवचनो का सार बताते हुए श्रीश जैन कहते है की प्रवचनों को सुनकर व्यक्ति को अपनी म्रत्यु के प्रति सजगता आना चाहिये। उसके भावो में परिवर्तन होना चाहिये। वह त्याग की ओर बढ़ना चाहिये। और एक समय ऐसा आना चाहिये कि व्यक्ति स्वयं कहे कि अब में पूर्णता की ओर बढ़ गया हूँ। मेरा कोई भी नही हैं। सगे सम्बन्धी, रिश्ते, नाते, धर्म गुरु, गुरु मंत्र आदि सब से मेरा कोई सम्बन्ध नही में सभी का त्याग करता हूं ,,, गुरुदेव की कही प्रत्येक बातें आज के वैज्ञानिक युग मे हम सभी को कभी भी कही भी देखने/सुनने मिल जाएगी अतः जब भी आपके भावो में परिवर्तन हो गुरुदेव के वचनों को सुनकर उन्हें सीमित कीजिये।
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
