दर्शनोंदय तीर्थ क्षेत्र के आदिनाथ बाबा के दर्शन कर भक्त हुए भाव विभोर
थुबोनजी
26 dec2021 की सुबह की बेला मे 20 भक्तो का समूह दर्शनोंदय तीर्थ क्षेत्र थुबोनजी की वन्दना दर्शन कर भाव विभोर हो गया। हो भी क्यों नहीं मालवा और बुंदेलखंड की पावन श्रंखला मे विध्यांचल पर्वतमाला की गोद मे बसा 26 जिन मंदिरों का वैभव समेटे हुए है। यह जैन संस्कृति की एक अमूल्य विरासत के रूप मे है। यहाँ के जिनमंदिरों मे भव्य अतिशयकारी प्रतिमाए विराजमान है। यात्री समूह के DR अरिहंत जैन जों चंडीगढ़ pgi मे कैंसर के डॉक्टर है उन्होंने कहा मेने कुछ दिनों का अवकाश लेकर अपने परिवार के साथ प्राचीन तीर्थ क्षेत्रो के दर्शन का भाव मन मे आया,परिवार जन से उन्होने बात की सभी ने हर्षित भाव से इसकी अनुमति दी। और 26 dec 2021 को हम सुबह की बेला मे दर्शनोंदय तीर्थ क्षेत्र थुबोनजी की वन्दना हेतु आए दर्शन कर वंदना कर इन मनोज्ञ जिनप्रतिमाओं की छवी मन को भक्ति रस से ओत प्रोत कर गयी।
तीर्थ विवरण
इसका विवरण जानने के बाद ज्ञात होता है इस क्षेत्र का उदभव लगभग 12 वी सदी मे पाडाशाह द्वारा हुआ था। एक रोचक बात कही जाती है की पाडाशाह के पास पारस पथरी थी। जिसका स्पर्श कराकर लोहे को सोना बना लेते थे। पारस पथरी से मिले धन का उन्होने सदुपयोग किया जगह जगह जिन मंदिर बनवाए भव्य प्रतिमाओं का निर्माण करवाया। यही उनकी दान शीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण कहा जाएगा।
28 फुट की उतंग मूलनायक प्रतिमा के दर्शन कर भक्त भाव विभोर
इस यात्री समूह मे डॉक्टर साहब के साथ श्री पदमकुमार जैन लुहाडिया रामगंजमंडी,सुलोचना लुहाडिया, जम्बू लुहाडिया, मधु लुहाडिया, शैलेश जुली पाटनी गुना, आनद रूचि टोंग्या हाटपिपलिया,सोना चाँदवाड जयपुर,प्रिया के साथ ही साथ बाल गोपाल पार्थ टोंग्या ने इन अलोकिक छायाचित्रों को क़ैद करने से अपने आप को नहीं रोक पाए। भवी सुहानी का मन भी गदगद हो गया। इन सभो का कहना था की थुबोनजी के खडे बाबा आदिनाथ भगवान की 28 फुट की उतंग मूलनायक प्रतिमा के दर्शन कर् मन भाव विभोर हो गया साथ ही साथ मन मे एक नयी उर्जा का संचार हुआ। इस समूह ने बाबा के समक्ष्य भक्ति आराधना की व भक्तामर स्तोत्र का पाठ किया।
इतिहास
मन्दिर क्रमाक 15 मे भगवान आदिनाथ की 28 फुट की उतंग मूलनायक खडगासन प्रतिमा के सम्भन्ध मे कहा जाता है यह प्रतिमा जब बनकर तैयार हो गयी तब अनेको लोगो द्वारा इसे खड़ा करने का प्रयास किया। किन्तु प्रतिमा हिल नहीं पायी। तब उसी रात्रि की बेला मे प्रतिष्ठा कराने वाले सज्जन को स्वप्न आया कि तुम प्रासुक जल से स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारणकर भक्ति के साथ देवपूजा को सम्पन्न कर इसे खड़ा करने का प्रयास करना। सुबह की बेला हुई उस सज्जन ने ऐसा ही किया जब द्रश्य वहा प्रकट हुआ वह सभी को विस्मिय विमुग्ध कर गया, एक व्यक्ति के द्वारा 28 फुट की उतंग की ऊँची विशाल प्रतिमा खड़ी कर दी। क्षेत्र के आसपास लोग यह भी कहते है यहाँ मध्य रात्रि मे घुंघरूओ की बजने की आवाज़ को सुना करते है। यहाँ के लोगो का मानना है देवगण प्रभु की भक्ति करने के लिए यहाँ आया करते है।
इस स्थान पर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के 2 वर्षायोग 1979 व 1987 मे सम्पन्न हुए है यह क्षेत्र तपोवन के रूप मे भी जाना जाता है यहाँ अनेक ऋषि मुनियों ने तपस्या की है।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

