आचार्य श्री वर्धमान साग़र महाराज के अवतरण दिवस पर अभूतपूर्व 111 मंडलीय चाँदनपुर महामंडल विधान सम्पन्न
श्री महावीर जी ।

महासन्त वात्सलय वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान साग़र जी महाराज के अवतरण दिवस पर 111 मंडलीय चाँदनपुर महामंडल विधान सम्पन्न हुआ जो भक्ति भाव के साथ हुआ संगीत की स्वर लहरियों के बीच भक्त झूमते नज़र आए इस महामंडल विधान में 111 मंडल बनाए गए जिसमे 111 जोड़े सम्मलित हुए
आचार्य श्री के सानिध्य में हुए महामंडल विधान पंडित श्री हसमुख जैन धरियावद के निर्दशन में हुआ पंडित श्री ने विधान के बारे में बताया कहा की इस विधान की रचना पूज्य मुनि श्री हितेंद्र सागर महाराज ने की यह 35 अर्घ का विधान है। यह इतिहास में पहली बार हो रहा है। महावीर अष्टक स्तोत्र के बाद यह विधान शुरु हुआ। जिसका उच्चारण मुनि श्री 108 हितेंद्र सागर महाराज ने किया भक्ति का आलम अभूतपूर्व था हर कोई भक्ति में मगन दिखाई पढ़ रहा था।मीठे रस के भरोसे, एक बार आओ प्रभु जी मारे आगना जैसे भजनों पर सभी थिरकते नजर आ रहे थे। इस महामंडल विधान के प्रथम बलय में 5 अर्घ समर्पित किये गए। हर बलय पूर्ण होने के बाद भक्त भक्ति में झूम रहे थे। सचमुच नजारा देखते ही बन रहा था। हितेंद्र साग़र महाराज ने चंद्रगुप्त जी महाराज के प्रति कृतज्ञता प्रकट की कहा यह विधान उन्ही के सहयोग से रचित हुआ है।
मन वचन काय यदि भक्ति मे लगा हो तो वो सार्थकता को प्राप्त होता है आचार्य श्री
पूज्य आचार्य भगवंत वात्सल्य वारिधि वर्धमान सागर महाराज ने कहा की मन वचन काया यदि प्रभु भक्ति मे लगी हुयी हो तो वो भक्ति सार्थकता को प्राप्त हो जाती है भक्ति के विषय मे बोलते हुए कहा की भक्ति के अनेक प्रकार है और कहा की भगवांन के गुणों का चिंतन करते हुए अपने मन को कोपवित्रता से सहित करते हुए प्रभु के गुणों का चिंतन करते हुए भगवान का स्मरण करे नृत्य करना भी प्रभु भक्ति का अंग है भगवान् के गुणों के प्रति विधान भगवान ने श्रावक धर्म की प्रधानत कहा गया है विधान भी भक्ति का अंग है \विधान करके हम जीवंत भगवांन आराधना करते है भक्ति करके अपने पुण्य को पाया है उस पुण्य के प्रतिफल पुण्यफल को पाने की इच्छा भी जाग्रत होती है
दीक्षा की हई घोषणा
आचार्य श्री के श्रीमुख से पांच oct 2022 को विजयादशमी के दिन दीक्षा होने की घोषणा की उन्होने कहा आज के अवसर पर तीन बहिनों ने दीक्षा के लिए भाव व्यक्त किया है तो उन्हे दीक्षा दी जाएगी दीक्षा के विषय मे कहा की कुछ लोग इसके लिए उम्र को देखते है एसा नहीं होता है 8 वर्ष की उम्र के बाद कभी भी वैराग्य जग सकता है दीक्षा लेना सामन्य बात नहीं है जिन्होने दीक्षा लेने का भाव किया है उन्होने संसार के जीवन के दुखो का अनुभव किया है गुरु संगती को प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य किया है
इनकी होगी दीक्षा
जिन बहिनों की दीक्षा होने जा रही उनमे साधना दीदी पुनम दीदी दीप्ती दीदी नेहा दीदी है
राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
