घरों में खटमल होता है उनके घरों में शुगर जैसी भयानक बीमारी नही होती
सुधासागर महाराज
ललितपुर
प्रातः अपने प्रवचनों की श्रंखला आरम्भ करते हुए गुरुदेव सुधासागर महाराज ने कहा कि संसार की हर वस्तु की दो स्थिति बनाई गई हैं जैसे माचिस की काडी से दिया जलाया जा सकता हैं तो किसी का मकान भी,, ज्ञानी अपने ज्ञान के माध्यम से मोक्ष गए हैं तो उसी ज्ञान का दुरुपयोग करने वाले नरक भी जाते हैं ,, भोजन भूख मिटाता हैं लेकिन कभी कभी वही भोजन नुकसान भी कर जाता हैं अतः आप अपनी नजरो को सकारात्मक बनाते हुए सभी वस्तुओं में अच्छाई खोजने का प्रयास करो यानि दुनिया की कोई भी वस्तु सर्वथा त्याज्य नही हैं यहाँ तक की सर्प जैसा प्राणी जो हमारी जान ले सकता हैं वही सर्प जब अपने घर मे रहें तो ड्स अथवा केंसर जैसे रोगों के जीवाणु उत्पन्न ही नही होने देगा।
पूज्यवर ने एक बहुत ही अद्भुत रहस्य उद्घाटित करते हुए बताया कि जिनके घरों में खटमल होता है तो उनके घरों में शुगर जैसी भयानक बीमारी नही होती। क्योंकि खटमल के काटने से हमारे शरीर में एक ऐसा जहर जाता हैं जो शुगर होने से रोकता हैं ,, मच्छर भी यदि आपको काट रहा हैं तो वह भी आपके शरीर मे एक ऐसा जहर छोड़ रहा हैं जिसके कारण आपके शरीर मे होने वाली कई बीमारियां दूर हो सकती हैं ,, प्रकति द्वारा बनाया गया यह चक्र बहुत ही शानदार तरीके से रचा गया हैं जो टीके हम आज डॉ से जाकर लगवाते हैं वही प्रकृति हमें मच्छर बिच्छू बरैया ततईया साँप आदि के काटने से देती हैं। इसलिए व्यक्ति को चाहिये कि वह नेचुरल मिलने वाले समस्त विषो का समय समय पर उपयोग करता रहे
इंसान जब जन्म लेता हैं तब उसकी कोई जात पात नही होती पक्षपात तो दुनिया मे आने पर मिलता हैं और मौत जब होती हैं तब भी उनमें किसी प्रकार का कोई भेद नही होता ,, प्रत्येक शरीर को जलाने पर राख ही मिलती हैं उसके अलावा यदि गरीब और अमीर के शरीर को जलाने पर कुछ और मिलता हो तो बताये।
गुरुदेव ने कटाक्ष स्वरों में कहा की एक समय था एक समय था जब गन्दगी गावो के बाहर हुआ करती थी। लोग गांव की सीमा के बाहर जाकर गन्दगी करते थे।और आज के इस पंचम काल की बलिहारी हैं कि गन्दगी घरों मे आ गयी हैं। घरों में ही नही कमरें तक आ गयी हैं ,,, गुरुदेव कहते हैं कि विज्ञान दवाई देगा किन्तु रोग का शमन नही करेगा। तभी तो आज हजारों डॉ होने के बाबजूद भी लाखों रोगी बने हुए हैं। जबकि पुराने जमाने मे एकाध वेद्य होता था। और कई सारे गाव के लोगो को निरोगी रखता था ,,, ज्ञान ,औषधि , ये चार वस्तुओं को हमेशा दान की कोटि में रखा गया हैं। जबकि आज के युग मे यही वस्तुयें व्यापार का माध्यम बन गयी हैं। एक जमाना था जब गुरु शिष्यो के द्वारा लाई गयी भिक्षा में से कुछ लेकर अपनी भूख मिटाता था। और आज वह परम्परा खत्म हो गयी हैं। परम्परा के खत्म होने से नुकसान देखिये कितना हुआ आज गुरु और शिष्य के बीच प्रेम का सम्बंध खत्म हो गया हैं ,,,
पूज्यवर के कथनानुसार आचार्यो ने दिगम्बर साधु को एक ऐसी शक्ति से नवाजा हैं कि वह अपने आहार करने एक व्यक्ति के चौके में जाता हैं किंतु उस समय शहर में लगने वाले सभी चौके वालो को भी साधु के आहार कराने का पुण्य मिलता हैं। इस प्रकार गिनती जोड़ने पर चातुर्मास काल मे साधु मात्र 120 घरों में जाता हैं।किंतु उसकी अनियत चर्या के कारण मिलने वाले परिणामस्वरूप जितने लोगो ने चौके लगाए हैं सभी को साधु के आहार कराने का पुण्य मिलेगा,,,
साधु की प्रत्येक क्रियाओ को देखा जाए तो ऐसा ही हैं साधु जाता तो एक गांव हैं किंतु रास्ते मे आने वाले सभी सुधि श्रावको को जिनकी अभिलाषा थी कि साधु का चातुर्मास हमारे शहर मे होवे उन्हें भी चातुर्मास कराने का पुण्य मिलेगा,,यानि आजकल के साधु अपनी जिंदगी में बहुत से बहुत 100 स्थानों पर चातुर्मास कर सकेंगे किन्तु लाभ लाखों गावो के लोगो को भी मिलेगा जिन्होंने साधु के चातुर्मास अपने शहर में कराने का प्रयास किया हैं ,,
श्रीश जैन ललितपुर की कलम से
श्रीश जैन ललितपुर प्रवचनों का सार लिखते हुए कहते है की गुरुजी के प्रवचनों को सुनने से यदि चूक गए हैं तो बहुत से ऐसे साधन हैं जहाँ से आप मेरे गुरू के प्रवचनों को सुन सकते हैं। और सिर्फ सुनने तक ही नही गुनने का भी प्रयास कीजिये जीवन सफल हो जायेगा।
श्रीश जैन ललितपुर से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
