क्षपक मुनि श्री चारित्र साग़र महाराज जीवन परिचय

धर्म

क्षपक मुनि श्री चारित्र साग़र महाराज जीवन परिचय
श्री शांति वीर शिव धर्माजीत वर्द्धमान सुरिभ्यो नमः
विशेष परिचय


मध्यप्रदेश खरगोन जिले में सनावद के निकट मोगावा ग्राम के श्रीमती भागादेवी श्री नेमीचंद जी के तृतीय पुत्र श्री त्रिलोकचंद जी का जन्म 27 जुलाई 1936 को सनावद में हुआ
व्रती संयमी जन्मदायनी माता से प्राप्त संस्कार
बचपन से जन्मदायनी माता से प्राप्त संस्कार समय समय पर द्रष्टिगोचर होते रहे। आपकी पूज्य माताजी
स्वयम प्रतिदिन एक रस का त्याग कर केवल एक समय भोजन करती थी
स्वयम हाथ से गेहूं पीस कर शुद्ध कपड़ो में 4 बहुएं होने के बावजूद खाना स्वयम बनाती थी। उनका
आजीवन शुद्र जल त्याग का नियम था। एवम साधुओ को आहार देती थी घर मे रहकर भी प्रतिमा व्रत नियमो का पालन करती थी।और यही संस्कार उन्होंने पुत्रो बहुओं पोते पोतियों को दिए।आपके 2 पुत्र एवम चार पुत्रियां है।
संस्कारो से वैराग्य का बीजारोपणइन्ही संस्कारो का बीजारोपण यह हुआ की इनके एक पुत्र श्री त्रिलोकचंद जी आगे चलकर मुनि श्री चारित्र सागर जी बने। तथा एक पोते श्री नरेन्द्र श्रीश्रेष्ठ सागर जी बन मुनि दीक्षा ली। आपको बता दे यह क्रम पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहा आगे चलकर इनकी पढ़पोती बाल ब्रह्म सिद्धा दीदी ने आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका 105 श्री महायशमती माताजी बनी।लेकिन व स्वयम पारिवारिक जिम्मेदारी कारण दीक्षा नही ले पाई थी।
सन्त समागम

नगर में चातुर्मास रत आर्यिका सुपार्श्वमति माताजी,आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी एवम श्री सिद्धवरकूट क्षेत्र आने वाले आचार्य संधो के समागम सानिध्य से वैराग्य की भावना वृद्धिगत होती रही।
वात्सल्य वारिधि  आचार्य श्री को दीक्षा के लिए श्रीफल भेंट
दो पुत्रों व चार पुत्रियों के सांसारिक दायित्वों से मुक्त होकर पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के 26 वर्षों बाद प्रथम नगर आगमन पर 14 मार्च 1993 को श्रीफल अर्पित कर एक वर्ष में मुनि दीक्षा देने हेतु निवेदन किया औऱ तभी से संघ में शामिल हो गए।
मुनि दीक्षा
पावन तीर्थक्षेत्र श्रवण बेलगोला में 25 नवम्बर 1993 को पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज से मुनि दीक्षा लेकर नाम मुनि श्री108 चारित्र सागर नाम प्राप्त किया।
व्रत उपवास
यदि हम उनके व्रत उपवास पर नजर डालें तो अल्पकालीन 9 वर्ष के साधु जीवन मे लगभग 800 से अधिक उपवास कर कर्मो की निर्जरा की।
चातुर्मास वर्ष 1993 में श्रवणबेलगोला,1994 श्रवणबेलगोला, 1995 श्री कुम्भोज बाहुबली,1996 गिंगला, 1997 पारसोला,1998किशनगढ़, 1999 जयपुर, 2000 टोडारायसिंह,2001 सनावद जन्मभूमि पर हुए।
सनावद में समाधि
एक संयोग रहा कि वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से सनावद चातुर्मास का निवेदन किया की सागर नही तो कुछ लहरे ही दे दीजिए।करुणाधारी आचार्य श्री ने संघस्थ मुनि श्री हित सागर जी, श्री चारित्र सागर जी, श्री अपूर्व सागर जी, श्री देवेन्द्र सागर जी एवम ऐलक श्री नमित सागर जी महाराज श्री को जन्म भूमि सनावद में सन 2001 का वर्षायोग करने की अनुमति दी।
चातुर्मास के बाद स्वास्थ्य प्रतिकूल होने से 21 जनवरी 2002 को आपकी समाधि हो गई। इसके एक संयोग कहा जाएगा की सनावद में जन्मे साधु की सनावद में समाधि हुई
परिवार को सुसंस्कार
मुनि श्री चारित्र सागर जी महाराज के संस्कारों एवम जीवन ने पूरे परिवार को त्याग मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया सबसे ज्यादा प्रभाव पोती पर हुआ। बाल ब्रह्मचारिणी सिद्धा जब 4 वर्ष की थी तब दादाजी ने 1993 में आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से श्रवण बेलगोला में सीधे मुनि दीक्षा ली वर्ष 2002 में मुनि श्री चारित्र सागर जी की समाधि जन्म नगरी सनावद में हुई, तब सिद्धा दीदी की उम्र मात्र 13 वर्ष की थी। उन्ही के संन्यास मार्ग से सिद्धा के मन मे वैराग्य का बीजारोपण हुआ।यह भी एक संयोग है कि
श्रवण बेलगोला में आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से 25 नवम्बर को श्री चारित्र सागर जी की दीक्षा हुई उसी पावन भूमि पर उन्ही आचार्य श्री से 25 वर्ष बाद 25 तारीख को पोती बाल ब्रह्मचारिणी सिद्धा दीदी आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका 105 श्री महायशमति माताजी बनती है।
पुत्री भी संन्यास मार्ग पर
आपकी बड़ी पुत्री साधना भी आपके संस्कार अनुरूप त्याग मार्ग पर अग्रसर है विगत 2 वर्षों से वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के संघस्थ हैपिछले वर्ष आपने आचार्य श्री से 2 व्रत प्रतिमा के नियम अंगीकार किये है ।आचार्य श्री की दीक्षा स्थली श्री महावीर जी मे आपकी भी आर्यिका दीक्षा संभावित है नगर सनावद का गौरव है कि सनावद के 16 साधुओ में पंचोलिया परिवार से 6 दीक्षा हुईआचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री चारित्र सागर जी,मुनि श्री श्रेष्ठ सागर जी,आर्यिका 105 श्री सुदृढ़मति माताजी,आर्यिका 105 श्री महायशमति माताजी,क्षुल्लक 105 श्री मोती सागर जी है। यही मंगल करते है की सभी धर्म की प्रभावना करते हुए सर्वोच्य पद को प्राप्त करे
राजेश पंचोलिया सनावद इंदौर 9926065065
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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