आर्यिका गौरवमति माताजी की आचार्य सुनील सागर महाराज की निश्रा में गौरवमयी समाधी

जयपुर

पूज्या आर्यिका 105 गौरवमति माताजी अपने आप मे एक गौरव थी। आपकी संयंम साधना अपने आप मे अदभुत थी आपका पूर्व नाम डॉक्टर प्रमिला दीदी था आपने गणिनी आर्यिका 105 सुपार्श्वमति माताजी से पहले ब्रह्मचर्य व्रत लिया बाद में वर्ष 2007 में जयपुर में गणिनी आर्यिका 105 सुपार्श्वमति माताजी द्वारा आपको आर्यिका दीक्षा प्रदान की गयी। आपका ब्रह्मचारी अवस्था मे वर्ष 1999 में रामगंजमंडी नगर में मंगल आगमन हुआ था। डॉ प्रमिला जैन की दीक्षा गणिनी आर्यिका 105 श्री सुपार्श्वमति माताजी द्वारा अपने संयम वर्ष के स्वर्णिम 50 वे वर्ष पर श्री नेमिसागर कालोनी जयपुर में 20 अक्टूम्बर 2007 विजयादशमी को आर्यिका दीक्षा दी गई। दीक्षा पश्चात नामकरण आर्यिका 105 गौरवमति माताजी दिया गया। विगत काफी वर्षो से आर्यिका 105 श्री सुपार्श्वमति माताजी के संघ में ब्रह्मचारिणी अवस्था मे रही। समाधि के पूर्व माताजी को वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी , पूज्य मुनि श्री अमित सागर जी, महाराज गणिनी आर्यिका 105 श्री ज्ञानमती माताजी का सम्बोधन उपदेश भी प्राप्त हुआ। 25 अगस्त को श्याम नगर से विहार कर आप भट्टारक जी की नसिया जी गए जहाँ निवापकाचार्य आचार्य 108 श्री सुनील सागर जी ससंघ सानिध्य में 25 अगस्त 2022 को सम्यक चेतना पूर्वक समाधि हुई।
यह भी संयोग ही कहा जाएगा वही शहर ज़हा उनकी दीक्षा हुई थी उसी स्थान पर उनकी समता पूर्वक समाधी हुई। सचमुच एक साधु जीवन का ध्येय होता है समता पूर्वक समाधी हो और वो भी आचार्य की निश्रा में माताजी की उत्कृष्ट समाधी आचार्य सुनील सागर महाराज की निश्रा में मध्य रात्रि में हुई।जैसा उनका भाव रहा वैसे ही उन्होंने अपने अंत समय मे पाया आपका ज्ञान, आपका त्याग सदा सदा चिरकालिक रहेगा। आपने आगम का गहनता से अध्यन किया और स्वयंम को साधना की ओर अग्रसर किया साथ सभी को कल्याण का मार्ग बताया जब आपकी दीक्षा हुई थी तो माताजी द्वारा सबसे प्राचीन कमंडल प्रदान किया था,
राजेश पंचोलिया वात्सलय भक्त परिवार
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
