प्रभु भक्ति में हो निष्ठा और श्रद्धा धर्म कभी घाटे का सौदा नहीं होता:विज्ञमती माताजी चम्पाबाग धर्मशाला में की धर्म चर्चा
ग्वालियर,
धर्म के मार्ग पर चलने वाला कभी छोटा या बूढ़ा नहीं होता, वह तो हमेशा जवान रहता है। धर्म कभी घाटे का सौदा नहीं होता, उससे हमेशा लाभ ही होता है। लेकिन उसमें निष्ठा और श्रद्धा होना जरुरी है।यह विचार ब्रह्म विद्या वाचस्पति पट्ट गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमती माताजी ने शुक्रवार को चम्पाबाग धर्मशाला में धर्म चर्चा करते हुए व्यक्त किए।
माताजी ने कहा कि चातुर्मास करने का मुख्य उद्देश्य जीवों की हिंसा रोकना होता है। वर्षाकाल में ऐसे असंख्य जीवों की उत्पत्ति होती है, जो हमें आंखों से दिखाई नहीं देते और जाने-अनजाने में उनकी हिंसा हो जाती है। माताजी ने बताया कि चातुर्मास अहिंसा, धर्म के पालन का पर्व होता है। इसलिए चातुर्मास में साबुत अनाज और पत्ती वाली वनस्पतियों का त्याग करना चाहिए। वैसे भी मांसाहारी का कभी कल्याण नहीं होता, इसलिए शाकाहारी बनें, अहिंसा के मार्ग पर चलकर भगवान महावीर के उपदेश को सार्थकता दीजिए।
पुण्यात्मा जीव बनें

माताजी ने कहा कि मिथ्यात्व के समय मधुर रस भी कड़वे लगते हैं। 18 दोषों से रहित आत्मा ही सम्यक दृष्टि होती है। मिथ्या दृष्टि कभी समवशरण में नहीं जा सकते। इस अवसर पर चातुर्मास समिति के मुख्य संयोजक पुरुषोत्तम जैन, विनय कासलीवाल, चक्रेश जैन, प्रवीण गंगवाल, सुरेंद्र जैन वैक्सीन, महेश जैन दलाल, सचिन जैन मुरार, प. चंद्रप्रकाश चंदर, धर्मचंद्र वरैया, अजीत वरैया, प्रवक्ता ललित जैन आदि उपस्थित थे।
