24 मुनि दीक्षा प्रदान कर जो नया जीवन दिया, इस उपकार दिवस को कोई नहीं भूल सकता। मुनि श्री निरोगसागर 

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24 मुनि दीक्षा प्रदान कर जो नया जीवन दिया, इस उपकार दिवस को कोई नहीं भूल सकता। मुनि श्री निरोगसागर

खुरई

साेमवार काे मुनि संघ के दीक्षा दिवस पर प्रातः की बेला मे नवीन जैन मंदिर से प्राचीन जैन मंदिर तक भव्य शाेभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा का आकर्षण का केंद्र युवा रहे जो धर्म ध्वजा लिए चल रहे थे। वही इस

क्रम मे भक्त आकर्षक थाल अष्ट द्रव्य के स्वर्ण, रजत एवं कांस्य की थालियों में सजे हुए थे भक्त आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। यह शोभायात्रा झंडा चौक होती हुई आदिनाथ जिनालय बड़कुल मंदिर होकर परसा चौराहा पहुंची, वहां से कार्यक्रम स्थल प्राचीन जैन मंदिर पहुंची।

वही मुनिश्री निरोगसागर महाराज, निर्माेहसागर महाराज, निष्पक्षसागर, निष्कामसागर, नीरजसागर एवं निस्संगसागर के बंडा, दमोह, पनागर, रांझी जबलपुर, छपारा एवं नागपुर से आए मुनि संघ के गृहस्थ जीवन के परिजन ने शास्त्र भेंट कर पुण्यार्जन किया। कार्यक्रम के शुभारंभ पर पाठशाला की बहनों एवं बाहर से आए श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री विद्यासागर महाराज की भक्तिमय  पूजन संपन्न कर अर्घ्य समर्पित किए। वही बुधवार को मुनिश्री विराटसागर महाराज का मुनि दीक्षा समारोह मनाया जाएगा। सुबह 7 बजे अभिषेक शांतिधारा संपन्न होगी।
इस पावन बेला मे मुनिराजो ने अपने गुरु का गुणानुवाद किया सर्वप्रथम पूज्य मुनि श्री निरोगसागर महाराज ने कहा
हमारे गुरुवर आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने आज से दस वर्ष पहले हम 24 मुनिराजों की मुनि दीक्षा प्रदान कर जो नया जीवन दिया, इस उपकार दिवस को कोई नहीं भूल सकता। जीने की कला तो सभी सिखाते हैं परन्तु हमारे गुरुवर ने हमें मरने की कला से पारंगत कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त किया। हमें प्रतिपल आत्मकल्याण के लिए सजग रहने की महती आवश्यकता है। गुरु हमेशा अपने शिष्य को नई ऊंचाइयों, बुलंदियों की पायदान पर सफल होता देखना चाहता है। मोक्ष मार्गी साधकों का एक ही लक्ष्य होता है, अपने जीवन का कल्याण कर समाधिमरण को प्राप्त कर जीवन-मरण से मुक्त होने का। मोक्षमार्गी साधकों अर्थात् मुुनि, आर्यिकाओं के जीवन में कभी यश, कीर्ति की चाहत नहीं होना चाहिए। मुनिश्री निष्पक्षसागर महाराज ने कहा कि गुरु की कृपा जिस पर हो जाए उसका जीवन निहाल हो जाया करता है। बीजाक्षरों से मंत्रित कर हमें दिगम्बरत्व प्रदान कर उन्होंने जो हम पर उपकार किया उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

संकलन अभिषेक जैन लुहांडीया रामगंजमंडी

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