वीतरागता दुर्लभ है, क्योंकि इसे समझने के लिए वीतरागी बनना पड़ेगा आचार्य श्री
कुडलपुर
सिद्धक्षेत्र कुडलपुर में आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज ने अपने उदबोधन में कहा नाखून में खून नही होता,खून नाखून के अंदर होता है। डॉक्टर खून के भीतर का परीक्षण करते अंगुलियों में कितना खून है। यह नाखुन देखकर पता करते है। लेकिन सबको पता है नाखून में खून नही होता। पर उसको देखकर पता लगाया जाता है।
जिस तरह वक्ता यह अनुमान लगा लेता है की सामने वाला अज्ञानी नही है। पर वह जान लेता है, उसे किस पक्ष का ज्ञान है। वह जान लेता है।
आचार्य भगवन ने आगे कहा आज के समय मे वीतरागता दुर्लभ है, क्योकी वीतरागता को समझने के लिए वीतरागी बनना पड़ेगा। वही उन्होंने तोल मोल और अनमोल को विस्तार से बताया की भगवान महावीर का कोई मूल्य नही है। इसलिये अनमोल है। पहले लोग मरण से नही डरते थे, लेकिन कर्ज से डरते थे। उन्होंने सभी को समझने औऱ व्यवहार करने का सन्देश सभी को दिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
