व्यवहार शुद्धि का मूल मंत्र है विनम्रता, केवल चरण स्पर्श नहीं: राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

व्यवहार शुद्धि का मूल मंत्र है विनम्रता, केवल चरण स्पर्श नहीं: राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज       राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ने श्री सम्मेद शिखर में कहा कि विनम्रता केवल चरण स्पर्श नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान, सहनशीलता और संस्कारित व्यवहार का नाम है। जानिए उनके प्रेरक जीवन […]

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आत्मचिंतन, संयम और साधना से ही होती है आत्मानुभूति की प्राप्ति : मुनि श्री निर्णयसागर महाराज 

आत्मचिंतन, संयम और साधना से ही होती है आत्मानुभूति की प्राप्ति : मुनि श्री निर्णयसागर महाराज  ‘विदिशा। श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर (स्टेशन जैन मंदिर), माधवगंज में आयोजित धर्मसभा में पाठशाला प्रणेता मुनि श्री 108 निर्णयसागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य अपने शुद्ध आत्मस्वरूप की पहचान करना है। जब तक […]

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निष्काम सेवा और संयम ही सच्चे धर्म का मार्ग: निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर महाराज

निष्काम सेवा और संयम ही सच्चे धर्म का मार्ग: निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर महाराज देई के नसियां जैन मंदिर में धर्मसभा, आत्मकल्याण, सेवा और सदाचार का दिया प्रेरक संदेश देई। देई स्थित नसियां जैन मंदिर में विराजमान निर्यापक श्रमण ज्येष्ठ मुनिश्री 108 योगसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि निष्काम भाव […]

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