अन्तर्मना उवाच

अन्तर्मना उवाच *जीते जी रिश्तों में आग और मरने के बाद आग,* *अपने ही लगाते हैं..* *इसलिए जीते जी जलना छोड़ दो,* *अन्यथः अपने ही जलायेंगे..!*       जैसा तुम जीना चाहते हो, वैसा ही सब जीना चाहते हैं। जैसे तुम सुख पाना चाहते हो, वैसै ही सब सुख पाना चाहते हैं। जो तुम […]

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अन्तर्मना उवाच

अन्तर्मना उवाच *मनुष्य असली स्वभाव छुपाकर रखता है,* *और विभाव का प्रदर्शन करता है..* *इसलिए दु:खी परेशान रहता है..!*     मनुष्य के पास स्वभाव जैसी कोई चीज नहीं बची है। *मनुष्य जैसा स्वभाव बनाता है, वैसा उसका स्वभाव बन जाता है*। मनुष्य – आज जैसा दिख रहा है वह वैसा है नहीं, यह पुराने […]

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अन्तर्मना उवाच

अन्तर्मना उवाच किसी को ये खौफ़ है कि परमात्मा देख ना ले..और किसी की ये आरजू है कि परमात्मा देखता रहे…!   एक फकीर हुआ जो बड़ा विद्वान, अनुभवी सन्त था।* एक दिन राह से गुजर रहा था, उसने सामने से आते हुए एक लंगड़े भिखारी को देखा। भिखारी की एक टांग टूटी हुई थी, […]

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