अन्तर्मना उवाच
अन्तर्मना उवाच *जीते जी रिश्तों में आग और मरने के बाद आग,* *अपने ही लगाते हैं..* *इसलिए जीते जी जलना छोड़ दो,* *अन्यथः अपने ही जलायेंगे..!* जैसा तुम जीना चाहते हो, वैसा ही सब जीना चाहते हैं। जैसे तुम सुख पाना चाहते हो, वैसै ही सब सुख पाना चाहते हैं। जो तुम […]
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